Ashna Ali

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धान का कटोरा कहे जानेवाले राज्य के श्रम से निकले धान के मामले में दिल्ली सरकार को संवेदनशील होने की सख्त जरूरत है। छतीसगढ़ से किसानों की उपज का 40 लाख मेट्रिक टन चाँवल दिल्ली की सरकार को लेने का निर्णय उनका अपना निर्णय है ।राज्य की सरकार तो महज प्रतिनिधि बन कर अपना दायित्व निभा रही है। 2500 रु में किसानों से प्रति क्विंटल धान खरीदने के निर्णय ने भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका अदा की है। वे प्रयासरत है। एक माह पूरे होने को जा रहे है इसके बावजूद भारत सरकार से उनके हिस्से का ही धान मिलिंग के लिए अनुमति न मिलना किसानों के श्रम का अवमूल्यन ही है। किसान का मान राजनीति से परे हो।

28 Dec 2020 05:46AM,
by: Ashna Ali