Babuaa Desk

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मैने रतन टाटा को कभी भी देश का सबसे प्रतिष्ठित उद्योगपति नहीं माना बल्कि सबसे प्रतिष्ठित दिलदार व्यक्ति माना जिसने धन के बजाय जन से बे इंतिहा मोहब्बत की। दुनियां में पैसे कमाने वाले करोड़ो लोग है लेकिन वे इसलिए याद रखे जाते है कि उनकी कंपनी ने साल में कितना मुनाफा कमाया या कितना घाटा हुआ।देश की बैंको से कितना कर्ज लिया, कितना एनपीए का लाभ लिया।जनता से कितना पैसा शेयर के रूप में लिया,लाभ दिलाया या डूबा दिया। कुछ औधोगिक घरानों को हम वैभव का असीमित प्रदर्शन करते हुए भी देखते है जो पारिवारिक कार्यक्रमों का सार्वजनीकरण करते है कि ऊब होने लगती है कि पारिवारिक कार्यक्रम है या ऐसा दिखावा जिससे दिखावा करने वाला परिवार ही उपहास और हास्य का प्रतिमान बन जाता है। टाटा परिवार ,इस देश की रीढ़ की हड्डी के रूप में स्थापित है। टाटा परिवार के संस्थापक ने इस देश के प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को दूसरी पंच वर्षीय योजना को उद्योग प्रमुख होने का साहस दिया। कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अगर देश उद्योगों के मामले में आत्म निर्भर हो रहा है तो इसकी बुनियाद टाटा परिवार ने ही रखी थी। अंग्रेजो ने भारत को इतना अशक्त बना दिया था कि सुई के लिए भी दूसरो पर निर्भर रहना पड़ता था। टाटा, रतन टाटा...

10 Oct 2024 09:21AM,
by: Babuaa Desk