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एक दुर्घटना की खबर कानो तक पहुँचती है, विश्वास करने और न करने के बीच यथार्थ अपने आवेग से मस्तिष्क को ये स्वीकारने को बाध्य कर देता है कि सच यही है कि विपिन रावत सर नही रहे।उनके देह का अवसान हो गया। संसार के सबसे प्रमाणित सत्य की शरीर नश्वर है की पुनः पुष्टि हुई। ये भी तय हुआ कि आपका आना और जाना आप पर निर्भर नही है।आप प्रारब्ध में फसेंगे और मृत्यु आपको आगोश में ले लेगी।।कल भी यही हुआ। कुन्नूर के जंगलों में विपिन( जंगल का ही पर्यायवाची) रावत का सपत्नीक दुखद निधन हो गया। किसी स्त्री के लिए उम्र के उत्तरार्द्ध में एक पति से ज्यादा मित्र की आवश्यकता के रूप जीवनसाथी बेहतर विकल्प होता है , ऐसे जीवनसाथी ने आखरी तक एक दूसरे का साथ नही छोड़ा ये भी भाग्य का सुखद पहलू है। विपिन रावत के अवसान के मायने

09 Dec 2021 05:37AM,
by: Naveen kumar sahu