23 Jun 2022

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आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जम्मू-कश्मीर में पार्टिया नए-नए मुद्दों की तलाश कर रही हैं। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं के पांच हजार साल पुराने शक्ति केंद्र शारदा पीठ को भाजपा बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है। भाजपा श्री शारदा पीठ को भारत की ज्ञान परंपरा का स्त्रोत व प्राचीन संस्कृति एवं सभ्यता का प्रतीक बता रही हैं।

भारतीय जनता युवा मोर्चा के पटनीटॉप में विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए हुए दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में शारदा पीठ स्मृति चिह्न प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना व अन्य नेताओं को प्रदान किए गए। इससे पहले भारतीय जनता युवा मोर्चा ही शारदा पीठ को पाकिस्तान से मुक्त करवाने की मांग को लेकर मोटर साइकिल रैली भी निकाल चुकी है। ।।।। उल्लेखनीय है कि श्री शारदा पीठ से कश्मीरी पंडितों के अलावा देश भर के हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं। कश्मीरी पंडितों की श्री शारदा पीठ के प्रति असीम आस्था भी है। राजा अशोक ने 237 ईसा पूर्व श्री शारदा पीठ मंदिर का निर्माण करवाया था। कश्मीरी पंडित लंबे समय से शारदा पीठ कॉरिडोर का निर्माण करवाने की मांग कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में पाकिस्तान से लगती लाइन आफ कंट्रोल से शारदा पीठ की दूरी केवल दस किलोमीटर है। भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष रिंकू चौधरी का कहना है कि देश की संसद ने 1994 में संसद में प्रस्ताव पारित कर जम्मू कश्मीर के सारे हिस्से जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू कश्मीर का हिस्सा भी शामिल है को जम्मू कश्मीर का अभिन्न अंग माना हुआ है। ऐसे में श्री शारदा पीठ पर पूजा अर्चना के अलावा कॉरिडोर बनाने की बात हो या फिर पाकिस्तान के अवैध कब्जे से इसे मुक्त करवाना, यह हमारा संकल्प है।

23 Jun 2022 01:00AM,
by: Imran Khan
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केदारनाथ यात्रा में बेजुबान जानवर मरते रहे लेकिन अपने मालिकों की जेब भर गए। केदारनाथ यात्रा में 46 दिनों में ही घोड़ा-खच्चरों से 56 करोड़ की आमदनी हो चुकी है। इसके बावजूद इन बेजुबानों की तकलीफ दूर करना वाला कोई नहीं है। जानवरों पर अमानवीय तरीके से यात्रियों और सामान को ढोया जाता है। यही कारण है कि अभी तक 175 जानवरों की मौत हो चुकी है। इस साल गौरीकुंड से केदारनाथ के लिए 8516 घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण हुआ था। बड़ी संख्या में तीर्थयात्री 16 किलोमीटर की इस दुर्गम दूरी को घोडे़ और खच्चरों पर बैठकर तय करते हैं। अब तक 2,68,858 यात्री घोड़े-खच्चरों से केदारनाथ पहुंचे और दर्शन कर लौटे। इस दौरान 56 करोड़ का कारोबार हुआ और जिला पंचायत को पंजीकरण शुल्क के रूप में करीब 29 लाख रुपये मिले। ।।इसके बावजूद इन बेजुबान जानवरों के लिए पैदल मार्ग पर कोई सुविधा नहीं है। मार्ग पर न गर्म पानी की सुविधा है और न कहीं जानवरों के लिए पड़ाव बनाया गया है। घोड़े-खच्चरों से केदारनाथ का एक ही चक्कर लगवाना चाहिए, लेकिन ज्यादा कमाई की होड़ में संचालक दो से तीन चक्कर लगवा रहे थे। साथ ही जानवरों को पर्याप्त खाना और आराम भी नहीं मिल रहा था। यात्रा के पहले ही दिन ही तीन जानवरों की मौत हो गई थी। इसके बाद शुरूआती एक महीने तक रोज जानवरों की मौत के मामले सामने आते रहे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. आशीष रावत ने बताया कि अभी तक 175 घोड़ा-खच्चरों की मौत हो चुकी है। पैदल मार्ग पर दो जानवरों की करंट लगने से भी मौत हुई थी। इसके बाद विभाग ने निगरानी के लिए विशेष जांच टीमें गठित की थीं। इस दौरान 1930 संचालकों और हॉकर के चालान किए गए।

23 Jun 2022 12:59AM,
by: Imran Khan