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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के हाथों 12वीं बोर्ड के टॉपर विद्यार्थियों का सम्मान
- बच्चों के बाल सुलभ सवालों के जवाब में अपने बचपन की यादों को दोहराया
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के हाथों बारहवीं की बोर्ड परीक्षा के टॉपर विद्यार्थियों का आज सम्मान किया गया। विद्यार्थियों के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बच्चों के बाल सुलभ सवालों का जवाब देते हुए बताया कि कक्षा में वे हमेशा मेधावी छात्र रहे। उनकी सभी विषयों में अच्छी पकड़ थी।
*गणित रहा प्रिय विषय*
मुख्यमंत्री ने कहा कि गणित उनका प्रिय विषय रहा है। गणित, फिजिक्स, अंग्रेजी, संस्कृत आदि विषयों में उनके बहुत अच्छे अंक आते थे। उन्होंने बताया कि उनकी मैट्रिक तक की शिक्षा कुनकुरी में हुई। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी हैंड राईटिंग इतनी सुन्दर थी कि शिक्षक इसे बच्चों को उदाहरण स्वरूप दिखाते थे।
मुख्यमंत्री ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित शिक्षा सम्मान समारोह में बारहवीं बोर्ड के टॉपर बच्चों को सम्मानित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ स्टेट टॉपर महक अग्रवाल को पुरस्कार स्वरूप स्कूटी की चाबी सौंपी। विस्तार न्यूज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह, जनसंपर्क आयुक्त श्री मयंक श्रीवास्तव, विस्तार न्यूज के चेयरमैन श्री मुकेश श्रीवास्तव उपस्थित थे। कार्यक्रम में बच्चों के साथ विस्तार न्यूज के एक्जीक्यूटिव एडीटर श्री ज्ञानेन्द्र तिवारी ने भी प्रश्न पूछे।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा विकास का मूल मंत्र है। शिक्षा के बिना जीवन अधूरा है। केवल रोजगार ही नहीं व्यापार, समाजसेवा, राजनीति, कृषि सहित सभी क्षेत्रों में सफलता के लिए शिक्षा जरूरी है। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 सहित प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में रोजगारपरक शिक्षा और बच्चों को नवाचारों के साथ रूचिकर ढंग से शिक्षा प्रदान करने पर जोर दिया गया है। राज्य सरकार द्वारा स्कूलों को बेहतर बनाने और अच्छी से अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश के 341 स्कूलों में पीएम श्री स्कूल योजना लागू की गई है। जहां बच्चों के लिए स्मार्ट क्लास, कम्प्यूटर, सुसज्जित लैब और अच्छी अधोसंरचनाएं विकसित की गई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के गठन के समय प्रदेश में एक मेडिकल कॉलेज था, आज 14 मेडिकल कॉलेज हो गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल के दौरान आईआईटी सहित राष्ट्रीय स्तर के सभी शैक्षणिक संस्थान छत्तीसगढ़ में स्थापित किए गए।
एक प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वे 10 वर्ष के थे, उनके सर से पिता का साया उठ गया था। परिवार की सारी जिम्मेदारी उन पर आन पड़ी थी। पढ़ाई के साथ-साथ खेती-बाड़ी और सामाजिक दायित्वों को भी उन्होंने अपने बाल्यकाल से निभाया। वे गुरूजनों का बड़ा सम्मान करते थे।
*शुरू से ही कक्षा नायक चुने जाते रहे*
पढ़ाई के अलावा उनकी रूचि के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें शुरू से ही कक्षा का नायक चुना जाता था। उनकी चिंता यह रहती थी कि कक्षा को कैसे व्यवस्थित रखूं। पढ़ाई के साथ-साथ खेती-बाड़ी में आज भी रूचि है। उन्होंने कहा कि आज भी जब भी समय मिलता है खेतों में अवश्य जाता हूं। बैल वाले नागर और ट्रैक्टर से भी उन्होंने खेती की है। मेरी सामाजिक कार्यों में भी गहरी रूचि रही है।
*जरूरतमंद मरीजों की मदद और इलाज मेरा जुनून रहा*
मुख्यमंत्री ने कहा - इसे मेरी हॉबी कहें या जूनून जरूरतमंद मरीजों का इलाज करना मेरी रूचि रही है। अपने सार्वजनिक जीवन में मुझे हजारों मरीजों का इलाज कराने का सौभाग्य मिला। छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री राहत कोष से भी इसके लिए मदद लेता रहा। उन्होंने कहा कि राजधानी रायपुर में जशपुर के जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए कुनकुरी सदन प्रारंभ किया गया है, यहां बड़ी संख्या में मरीज अपना इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं, जहां मरीजों के रहने की व्यवस्था की गई है और अस्पतालों में इलाज कराने के लिए सभी जरूरी सहयोग प्रदान किया जाता है।
*सालभर की मेहनत से परीक्षा का भय नहीं रहा*
एक छात्रा ने पूछा कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी आप कैसे करते थे। परीक्षा से आपको भय लगता था क्या। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा - हमारे फिजिक्स और इंग्लिश के शिक्षक इतने रोचक तरीके से पढ़ाते थे कि बात दिमाग में बैठ जाती थी। इंग्लिश पढ़ाने के लिए टीचर हमें ग्राउण्ड और बगीचे में ले जाते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे सालभर गंभीरता से पढ़ाई करते थे और अच्छे से नोट्स तैयार करते थे। कहीं कठिनाई होने पर शिक्षकों से पूछने में नहीं हिचकते थे, चूंकि सालभर मेहनत होती थी, इसलिए परीक्षा से भय नहीं लगता था।
*गंभीर और कम बोलने वाले छात्र रहे*
बेस्ट फ्रेंड और दोस्तों के साथ शरारत के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि वे गंभीर और कम बोलने वाले छात्र थे। कुनकुरी के अनेक मित्रों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनके सभी मित्र मेधावी थे। इनके अलावा राजनीति में मेरे अनेकों मित्र हैं।
कार्यक्रम में टॉपरों के साथ विशेष रूप से सुकमा के नक्सल प्रभावित परिवार के 12वीं के छात्र सुनील कोर्राम का मुख्यमंत्री ने सम्मान किया। जिसने अपनी लगन और मेहनत से 58 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। छत्तीसगढ़ी लोक गायिका आरू साहू और लोक कलाकार आकाशी व्यास को भी मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सम्मानित किया।
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