शिलांग, सोनम, सियेम, सिलोम और सोहरा
संजय दुबे
पिछले एक महीने से शिलांग (मेघालय) देश भर के लिए चर्चा की स्थान बना हुआ है। शिलांग के साथ सोनम बेवफा भी चर्चे में है। सोनम के राजा रघुवंशी हत्याकांड में प्रमुख किरदार बताने वाले शिलांग के पुलिस अधीक्षक विवेक सिएम भी देशभर में चर्चित हुए है।
इन्होंने राजा रघुवंशी और सोनम के हनीमून के लिए आने के बाद, दोनों के लापता होने, राजा के शव बरामद होने से लेकर मेघालय पर्यटन पर उठते प्रश्न चिन्ह, स्वाभिमान ओर रघुवंशी परिवार के सवालिया आक्रमण का बड़े शांत ढंग से सामना किया। सुनियोजित ढंग से इंदौर, बीना, विदिशा और ग्वालियर पुलिस के साथ मिलकर राजा रघुवंशी हत्याकांड की गुत्थी को लगभग सुलझा ही लिया है।
राजा रघुवंशी हत्या के बहुचर्चित मामले में राजा रघुवंशी को मारने के लिए पांच आरोपियों सोनम, राज कुशवाह सहित तीन युवक गिरफ्तार होकर मेघालय पहुंच गए है। इनको सहायता देने और साक्ष्य मिटाने के नाम पर तीन व्यक्ति सिलोम जेम्स(प्रॉपर्टी एजेंट), लोकेंद्र सिंह तोमर(प्रॉपर्टी ऑनर)सहित इंदौर के जिस बिल्डिंग में सोनम छिपी थी, उसका गार्ड भी गिरफ्तार हो चुका है ।
राजा रघुवंशी हत्याकांड को सोनम रघुवंशी और राज कुशवाह ने बहुत ही शातिर तरीके से योजनाबद्ध किया था। राजा को मारने के लिए A, B, C, D, और E पांच प्लान थे उन्होंने बनाया था।इसके अलावा उनके पास F प्लान भी था। A प्लान शादी के पहले ही ओंकारेश्वर के जाकर नर्मदा में डूबा देने का था।B प्लान में गुवहाटी में ही मार देने का था।C प्लान में सेल्फी लेने के नाम पर पहाड़ से धकेल देना था।D प्लान में गोली मार कर हत्या कर देना था। F प्लान जिसे वे अंजाम देना चाहते थे और दिए, वह था मेघालय के स्थानीय हथियार से राजा रघुवंशी की हत्या करना, राजा रघुवंशी के सोने के आभूषण को गायब करना ताकि जब कभी लाश और हथियार मिले तो मेघालय के स्थानीय लोगों पर ही लूटपाट और हत्या का शक जाए।
राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी के लापता होने पर यही कहानी चर्चे में आई ।मेघालय के लोग और पर्यटन इसी के कारण बदनाम भी हुआ।रघुवंशी परिवार सहित देश भर के लोगों ने तोहमत लगाना शुरू कर दिया।मेघालय पुलिस पर भी शक की सुइयां घूमी। सीबीआई से जांच की मांग राज्य के मंत्री, मुख्यमंत्री ने किया। इन सबसे परे शिलांग पुलिस अधीक्षक विवेक सिएम गुत्थी सुलझाने के लिए एसआईटी बनाकर लग चुके थे।
शिलांग के पहाड़ी इलाके में सर्चिंग, इंदौर पुलिस से चुपचाप संदिग्ध लोगों के मोबाइल नंबर जो इंदौर के होकर शिलांग में एक्टिव थे, भेजा। परिणाम ये हुआ कि सात से नौ जून के बीच पांच आरोपी अलग अलग जगह से गिरफ्त में आ गए। सोनम रघुवंशी ने अपने बचने के लिए शिलांग में स्कूटी को लावारिश छोड़ने के बाद खुद के अपहरण और नशा देने की कहानी बनाई थी, कमजोर साबित हुई। पांच लोग तो हत्या को लूटपाट , अपहरण हत्या का जामा पहनाने में विफल रहे तो साक्ष्य मिटाने का खेल शुरू हुआ। इसमें भी विफलता मिली और तीन आरोपी ऐसे पकड़े गए जो सोनम रघुवंशी के बैग,कपड़े, मोबाइल, देशी पिस्टल, लैपटॉप सहित नगदी को गायब करने के लिए संलिप्त पाए गए है। आश्चर्य की बात है कि ग्वालियर में बैठा आदमी, इंदौर के ब्रोकर को मकान किराए से देने और दूसरी चाबी देकर महज सात दिन में घर खाली भी करा लेता है।
यही नहीं ब्रोकर बाकायदा घटना घटित होने के बाद चैनल में आकर बकायदा अपनी सफाई दे रहा था। बंगले का गार्ड साक्ष्य मिटाने के लिए मदद कर रहा था। हत्या करने और करवाने के लिए सोनम, राज कुशवाह सहित तीन आरोपी निचली अदालत से तो मौत की सजा या आजीवन कारावास की सजा पाएंगे ही ये तय है।साक्ष्य मिटाने वाले तीन आरोपी अधिकतम सात साल की सजा में से किने साल की सजा पाएंगे ये भविष्य का प्रश्न है। इस घटना में सजा देने वाले न्यायधीश के सामने एक मासूम को मारने के लिए शातिर सोनम और राज तो कठोर सजा पाएंगे क्योंकि एक नहीं चार बार के असफल प्रयास के बाद राजा रघुवंशी को मरवाए है। राजा रघुवंशी पर घातक हथियार से मृत्यु कारित हमला के लिए भी बराबर की ही सजा होगी।
इस घटना से मेघालय राज्य, सरकार, पुलिस और जनता के साथ उनके रोजगार के रूप में पर्यटन को भी नुकसान पहुंचा है।न्याय करते समय न्यायधीश ये बात भी ध्यान रखेंगे। न्यायिक सजा जब मिलेगी तब मिलेगी लेकिन सामाजिक सजा शुरु हो चुकी है। सोनम रघुवंशी इस मामले की सबसे बड़ी साजिशकर्ता है जिसने एक परिवार के विश्वास के साथ विवाह जैसे पवित्र संस्कार पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया।
राखी जैसे भाई बहन के संबंध के त्यौहार की गरिमा को तार तार कर दिया। सोनम जो विलासिता पूर्ण जीवन जी रही थी , राजा रघुवंशी की हत्या करवाने के बाद बदहवास शिलांग से भागते भागते इंदौर पहुंची, इंदौर से बनारस की तरफ भाग रही थी। अपने बचने के लिए एक महिला भी खोज रही थी जिसकी हत्या कर उसे स्कूटी के साथ जला कर बचने का F प्लान भी बनाया हुआ था ये प्लान सफल नहीं हुआ। जब आरोपी पकड़ा गए तो खुद को बचाने के लिए अपहरण, ड्रग्स की कहानी रच रही थी, ये बात भी बेबुनियाद साबित हुई। राज कुशवाह ने अपने साथ लाखों सहयोगी कर्मियों के प्रति मालिकों में अविश्वास पैदा कर दिया है। ये इस घटना का दुर्भाग्यपूर्ण पहलू है।
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