पेट्रोल में मिलावट और मुनाफाखोरी

संजय दुबे

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केंद्र सरकार के आदेश के पालन में छत्तीसगढ़ में पेट्रोल पंपों को सरकार ने लाइसेंस से मुक्त कर दिया है।नियंत्रण में रहने वाले पेट्रोल पंप अब मुक्त है।इनके यहां कितना पेट्रोल डीजल आता है, बिकता है, बचा है, मिलावटी है अथवा नहीं है, सही दाम में सही माप में मिल रहा है, अथवा नहीं मिल रहा है।

इसकी कोई सुनवाई नहीं है। मध्य प्रदेश में भी पेट्रोल पंपों को लाइसेंस से मुक्त कर दिया गया है।स्थिति ये है कि मुख्यमंत्री के ही वाहनों में पेट्रोल डीजल की जगह पानी निकल रहा है। भारत सरकार ने आवश्यक वस्तु की जो सूची जारी कर रखी है उसमें डीजल पेट्रोल भी शामिल है। इन दोनों के अभाव या कमी से अफरातफरी मच जाती है। इस खतरे को अनदेखा कर नियंत्रण से मुक्त कर देना प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है।

आम उपभोक्ता के लिए पेट्रोल का मतलब केवल पेट्रोल होता है, जो पेट्रोल पंप के डिस्पेंसिंग यूनिट से निकल कर वाहन के टैंक में चला जाता है।इससे परे रसायन शास्त्र के अनुसार समझे तो सरकार ने भारत की तेल कंपनियों को पेट्रोल में दस फीसदी एथेनॉल मिलाने की छूट दी है। एथेनॉल मिलाने का फायदा भी है ।इसके मिश्रण से पर्यावरण को बचाने में मदद मिलती हैं। कार्बन का प्रतिशत कम होता है करके। 2025तक पेट्रोल में अधिकृत रूप से बीस प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का प्रस्ताव है। वर्तमान में 90प्रतिशत पेट्रोल और 10प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर एक लीटर पेट्रोल 100रुपये का होता है। एथेनॉल का मूल्य वर्तमान में 58रुपए लीटर है।

दस फीसदी पेट्रोल की मात्रा कम करने पर 10रुपये का पेट्रोल कम होगा और 5.80 रुपए का एथेनॉल मिलाने के बाद सिद्धांत: 4.20रुपए प्रति लीटर मूल्य कम भी होना चाहिए । ये तो बात भविष्य की है वर्तमान में ये भी तय है कि अगर पेट्रोल में सुनियोजित ढंग से अभी भी 5से 10प्रतिशत एथेनॉल की मिलावट कर दिया जाए तो एक लीटर पेट्रोल बेचने में 2.90से 5.80रुपए प्रति लीटर की मुनाफाखोरी हो सकती है। चूंकि पेट्रोल पंप सरकार के खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग से मुक्त हो चुके है या कहे नियंत्रण से मुक्त हो गए है तो इस प्रकार के मिलावट और मुनाफाखोरी की जांच कौन करेगा? सरकारे, नियंत्रण मुक्त व्यापार की समर्थक है, अच्छी बात है।

निजी कंपनियों को मुक्त व्यापार के लिए सरकारी कंपनियों की तुलना में आगे करना चाहती है और अच्छी बात है लेकिन आम आसजग उपभोक्ता को मिलावटी पेट्रोल और ज्यादा दाम में बिकवाने के लिए नियंत्रण मुक्त रखे ये आम उपभोक्ता के साथ छल है कपट है


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