केंद्र ने "संवैधानिक अराजकता" की चेतावनी दी
सरकार ने राष्ट्रपति और राज्यपालों पर विधेयकों को मंज़ूरी देने के लिए समय-सीमा थोपने के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है, जो सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश से अलग है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने अप्रैल में विधायिका द्वारा पारित विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए राष्ट्रपति के लिए तीन महीने और राज्यपालों के लिए एक महीने की समय-सीमा निर्धारित की थी।
सरकार ने शीर्ष अदालत को दिए एक लिखित निवेदन में कहा कि ऐसी समय-सीमाएँ सरकार के किसी अंग द्वारा उन शक्तियों का अतिक्रमण करने के समान होंगी जो उसके पास निहित नहीं हैं, जिससे शक्तियों के नाज़ुक पृथक्करण में बाधा उत्पन्न होगी। साथ ही, सरकार ने चेतावनी दी कि इससे "संवैधानिक अराजकता" पैदा होगी।
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