विधेयक पर मंजूरी में देरी, सुप्रीम कोर्ट ने रखा फैसला सुरक्षित

feature-top

सुप्रीम कोर्ट ने खुद को संविधान का संरक्षक बताते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि कोई संवैधानिक पदाधिकारी, जैसे कि राज्यपाल, अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता है, तो क्या अदालत चुप बैठ सकती है?

यह टिप्पणी राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए उस संदर्भ पर सुनवाई के दौरान आई, जिसमें सवाल उठाया गया था कि क्या राज्यपाल और राष्ट्रपति किसी विधेयक को मंजूरी देने में अनिश्चितकाल तक देरी कर सकते हैं

और क्या अदालत उनके लिए समयसीमा तय कर सकती है।


feature-top