सुप्रीम कोर्ट ने विचाराधीन कैदियों के मताधिकार पर केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा

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सुप्रीम कोर्ट ने विचाराधीन कैदियों के मताधिकार यानी वोट देने के अधिकार से जुड़े एक अहम मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

मामला जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 62(5) से जुड़ा है, जो कुछ कैदियों को मतदान के अधिकार से वंचित करती है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह धारा असंवैधानिक है और यह कैदियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। अदालत ने सरकार और चुनाव आयोग दोनों से कहा है कि वे इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट पक्ष रखें।


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