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रायपुर में कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस, जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने रविवार को राजधानी रायपुर स्थित राजीव भवन में एक प्रेस वार्ता आयोजित की। इस मौके पर सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून की 20वीं वर्षगांठ और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि “यूपीए सरकार द्वारा लाया गया सूचना का अधिकार कानून आज 20 वर्ष पूरे कर चुका है। यह कानून आम जनता को शासन-प्रशासन से जुड़ी जानकारी तक पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम है।” उन्होंने बताया कि 12 अक्टूबर 2005 को आरटीआई कानून लागू हुआ था। इसके बाद यूपीए सरकार ने एक के बाद एक कई ऐतिहासिक कानून लागू किए 2005 में मनरेगा, 2006 में वन अधिकार अधिनियम, 2009 में शिक्षा का अधिकार और 2013 में भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा कानून।
दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “जबसे भाजपा की सरकार आई है, सूचना के अधिकार को कमजोर करने की साजिश की जा रही है। कई महत्वपूर्ण सार्वजनिक सूचनाओं को अब ‘निजी जानकारी’ बताकर छुपाया जा रहा है। डबल इंजन की सरकार जनता से सच छिपाने का प्रयास कर रही है।” इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि “आज देश में जांच एजेंसियां निष्पक्ष नहीं रह गई हैं। अब तो फैसला पहले से लिखा होता है, बस औपचारिकता पूरी की जाती है।
अदालत में सफाई देने का क्या अर्थ रह गया है, जब सज़ा पहले तय कर दी जाती है।” बघेल ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में जांच एजेंसियां झूठे साक्ष्य तैयार कर रही हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। उनके अनुसार, “लोकतंत्र का ढांचा डगमगा गया है। जांच एजेंसियां अब अदालत की कार्रवाई को प्रभावित कर रही हैं। पहले जो ‘कलमबंद बयान’ अदालत की निगरानी में होता था, अब उनमें भी छेड़छाड़ की जा रही है।” उन्होंने कोयला घोटाले के उदाहरण का जिक्र करते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ तैयार कलमबंद बयान, जिसे न्यायाधीश के समक्ष खोला जाना चाहिए था, उसे सरकारी अधिकारियों ने पहले ही खोल लिया।
जब उसकी कॉपी मीडिया हाउस तक पहुँची, तो उसमें अलग-अलग फॉन्ट पाए गए। दो दिनों में 25 पन्नों के बयान कैसे दर्ज कर लिए गए?” अंत में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी आरटीआई जैसे जनहितकारी कानूनों की मजबूती और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी।
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