कलेक्टर एवं डीएफओ बैठक : वन भूमि प्रबंधन और संरक्षण पर जोर

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राज्य में आयोजित कलेक्टर एवं डीएफओ की बैठक में मुख्यमंत्री ने वन भूमि से जुड़े प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर छोटे-बड़े झाड़ वाले जंगलों का रिकॉर्ड जांचकर दुरुस्त करें और लैंड बैंक को नियमित रूप से अपडेट करें।

मुख्यमंत्री ने बंजर एवं अनुपयोगी भूमि तथा नदियों के किनारे वृक्षारोपण को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इन भूमियों पर अतिक्रमण न हो, इसके लिए विशेष निगरानी रखी जाए और इनका उपयोग शासकीय विकास कार्यों में किया जाए। वन अधिकार पत्र वितरण में भी सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक निर्णय सेटेलाइट इमेज के आधार पर लिया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे। बैठक में बताया गया कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत दो वर्षों में 6 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया है। राज्य में माइक्रो अर्बन फॉरेस्ट वृक्षारोपण की भी शुरुआत की गई है। इको-टूरिज्म को लेकर कहा गया कि इसमें आजीविका के बड़े साधन छिपे हैं। प्रदेश के 240 नैसर्गिक पर्यटन केंद्रों से स्थानीय युवाओं और लोगों को वर्षभर रोजगार मिल रहा है।

इससे अप्रत्यक्ष रूप से लगभग दो हजार परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। बैठक में गज संकेत (Elephant App) की भी चर्चा हुई, जिसके माध्यम से हाथियों की वास्तविक समय में ट्रैकिंग की जा रही है। यह ऐप कम नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी काम करता है और ग्रामीणों को क्षेत्रीय भाषाओं में जागरूकता व सुरक्षा से जुड़ी जानकारी प्रदान करता है। छत्तीसगढ़ में इस ऐप की सफलता को देखते हुए देश के 6 अन्य राज्यों में भी इसका उपयोग शुरू किया गया है।

वर्तमान में यह 14 वनमंडलों में लागू है और शीघ्र ही सभी वनमंडलों में इसे विस्तारित किया जाएगा।


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