अगर आदेश लागू न हों, तो न्याय का कोई अर्थ नहीं : सुप्रीम कोर्ट

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देश की सर्वोच्च अदालत ने देशभर में लंबित पड़े 8.82 लाख से अधिक निष्पादन याचिकाओं (अदालती आदेशों को लागू करवाने के लिए दायर याचिकाएं) पर कड़ी नाराजगी जताई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति बेहद निराशाजनक और चिंताजनक है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस पंकज मित्तल की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, अगर अदालत का आदेश वर्षों तक लागू ही न हो सके, तो फिर ऐसे आदेश का कोई मतलब नहीं रह जाता।

यह न्याय का मजाक बन जाएगा। अदालत ने बताया कि देशभर में कुल 8,82,578 निष्पादन याचिकाएं लंबित हैं। मार्च 2024 से अब तक लगभग 3.38 लाख मामलों का निपटारा किया गया है, लेकिन बड़ी संख्या में याचिकाएं अब भी लंबित हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्टों को निर्देश दिया है कि वे जिला अदालतों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें, ताकि पुराने मामलों का शीघ्र निपटारा किया जा सके और न्यायिक आदेशों के पालन को सुनिश्चित किया जा सके।


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