तेजस्वी यादव का नया दृष्टिकोण "पीडीए" रणनीति

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बिहार के राजनीतिक परिदृश्य के जटिल ताने-बाने में, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) लंबे समय से एक मज़बूत खिलाड़ी के रूप में खड़ा रहा है, जिसकी जड़ें मुस्लिम-यादव गठबंधन की ज़मीन में गहरी जमी हुई हैं। यह गठबंधन, जिसे अक्सर "माई" गठबंधन कहा जाता है, पार्टी के लिए एक आधारभूत शक्ति और एक सीमित कमज़ोरी दोनों रहा है।

तेजस्वी यादव का नया दृष्टिकोण, जिसे "पीडीए" रणनीति कहा जा सकता है - जिसमें पिछड़ा (पिछड़ी जातियाँ), दलित और अल्पसंख्याक (अल्पसंख्यक) के साथ-साथ ऊँची जातियाँ भी शामिल हैं - बिहार की विकसित होती सामाजिक-राजनीतिक गतिशीलता के प्रति गहरी जागरूकता को दर्शाता है। इस रणनीति का उद्देश्य न केवल खोई हुई ज़मीन वापस पाना है, बल्कि नीतीश कुमार जैसे प्रतिद्वंद्वियों के मज़बूत गढ़ को भी ध्वस्त करना है, जिन्होंने जातिगत जटिलताओं को कुशलता से पार करते हुए महादलितों और अति पिछड़ा (अति पिछड़ा वर्ग) का अपना गठबंधन बनाया है।


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