आरएसएस सत्ता के लिए नहीं, राष्ट्र के गौरव के लिए काम करता है : मोहन भागवत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि हिंदू समाज को राष्ट्र के गौरव के लिए संगठित करना है।

उन्होंने कहा कि भारत में कोई ‘अहिंदू’ नहीं है, क्योंकि सभी एक ही पूर्वजों के वंशज हैं और देश की मूल संस्कृति हिंदू है।

भागवत बेंगलुरु में ‘संघ की 100 वर्ष की यात्रा: नए क्षितिज’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में बोल रहे थे। इस अवसर पर आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग मौजूद थे।

आरएसएस प्रमुख ने कहा, “जब संघ के रूप में एक संगठित शक्ति खड़ी होती है, तो उसे सत्ता की इच्छा नहीं होती। वह समाज में प्रमुखता नहीं चाहता, बल्कि भारत माता की महिमा के लिए समाज की सेवा और संगठन चाहता है।

पहले लोगों को इस पर विश्वास करना कठिन लगता था, लेकिन अब वे विश्वास करने लगे हैं।” भागवत ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि हिंदू समाज को अपनी संस्कृति और पहचान पर गर्व होना चाहिए, क्योंकि यही भारत की आत्मा है।


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