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महानदी के तट पर गूंजा जय छत्तीसगढ़ का नारा
भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय एवं उड़ीसा शासन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित बालीयात्रा कटक महोत्सव जो कि दिनांक 5 नवंबर से प्रारंभ होकर 14 नवंबर को महानदी के तट पर संपन्न हुआ, जिसमें लगभग 20 राज्य के कलाकारों ने भागीदारी निभाया। अत्यंत ही गर्व की बात है कि इस महोत्सव में उड़ीसा शासन के द्वारा बिलासपुर की लोकप्रिय संस्था लोक श्रृंगार भारती गेड़ी लोक नृत्य दल को शानदार तेरहवां साल आमंत्रित किया गया।
अनिल कुमार गढ़ेवाल के कुशल नेतृत्व में 19 सदस्यीय गेड़ी लोक नृत्य दल ने दिनांक 10 नवंबर को बालीयात्रा के विराट मंच पर गेड़ी लोक नृत्य का शानदार प्रदर्शन किया, जिसे देखकर कटकवासी भाव विभोर हो गए । अनिल कुमार गढ़ेवाल के द्वारा गाया हुआ गीत " काट ले हरिहर बांसे जो भला" गीत पर दर्शकगण झूम उठे। वहीं मुख्य मांदल वादक मोहन डोंगरे ने एक ही जगह पर घूम-घूम कर बिना लय टूटे मांदल वादन किया तो दर्शकगण की तालियां से महानदी का तट गूंज उठा, वही सौखी लाल कोसले ने हारमोनियम पर गेड़ी नृत्य गीत बजाकर दर्शकों को मोहित किया तथा महेश नवरंग के बांसुरी वादन से दर्शक भाव विभोर हो गए।
सह मांदल वादक के रूप में भरत वस्त्रकार ने लय एवं ताल पर गेड़ी नर्तकों को खूब नचाया । ढोलक पर द्वारिका लाश्कर ने ताल देकर समा बांध दिया । कौड़ियों चीनी मिट्टी की माला पटसन वस्त्र पहनकर मुख्य गेड़ी नर्तक प्रभात बंजारे तथा सूरज खांडे के गेड़ी में खड़े रहने के बावजूद उनके कंधों पर सवार होकर शुभम भार्गव ने गेड़ी को हवा में लहराया तो महानदी का तट दर्शकों की तालिया से गुंजायमान हो गया।
वही चेतन कुर्रे तथा चंद्रशेखर केवट ने एक ही गेड़ी पर नृत्य करके सबको मंत्र मुग्ध कर दिया । लक्ष्मी नारायण माण्डले तथा मनोज माण्डले फूलचंद ओगरे ने भी सह गेड़ी नर्तक की भूमिका निभाकर दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया ! भाव नर्तक के रूप में शुभम भारद्वाज उदय खांडे ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गेड़ी नृत्य के पश्चात कटक जिला के कलेक्टर श्री दत्तात्रय भाऊसाहेब शिंदे ने मंच पर आकर दल प्रमुख एवं नृत्य निर्देशक अनिल गढ़ेवाल एवं साथियों का शाल श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया ।
ज्ञातव्य हो कि गेड़ी नृत्य दल को उड़ीसा शासन ने लगातार तेरहवां साल आमंत्रित कर सम्मानित किए हैं । राज्योत्सव के अवसर पर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपना काफिला रुकवा कर गेड़ी नृत्य का प्रदर्शन देखा था तथा हाल ही में भारत सरकार द्वारा आयोजित लोक महोत्सव हैदराबाद में गेड़ी नृत्य के प्रदर्शन ने छत्तीसगढ़ का परचम लहरा दिया था तथा राज्योत्सव बिलासपुर में भी गेड़ी नृत्य के प्रदर्शन को खूब वाह वाही मिली थी !
ऐसा प्रदर्शन जो रामायण काल से भी अधिक पुराना है उसमें आधुनिकता का एक अंश भी नजर नहीं आता। गीत, संगीत, नृत्य शैली, और वाद्य यंत्र तथा प्रमुख रूप से वेशभूषा पूर्णतः परंपरा पर आधारित प्रस्तुति को देखकर दर्शक गण मुक्ध हो जाते हैं ।
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