सुप्रीम कोर्ट का तलाक-ए-हसन पर सख्त रुख

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सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-हसन प्रथा को लेकर कड़ी नाराज़गी जताई और सवाल उठाया कि क्या आधुनिक समाज में महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली इस प्रथा को जारी रखा जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने संकेत दिया कि तीन तलाक के बाद अब तलाक-ए-हसन को भी असंवैधानिक घोषित करने पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि यह मामला महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्नों से जुड़ा है और इसे पाँच जजों की संविधान पीठ को भेजा जा सकता है।

कोर्ट ने सभी पक्षों से इस संबंध में व्यापक मुद्दों की सूची नोट के रूप में प्रस्तुत करने को कहा है।

तलाक-ए-हसन में मुस्लिम पुरुष तीन महीनों में एक बार “तलाक” बोलकर तलाक दे सकता है, जिसे कोर्ट ने महिलाओं के अधिकार और गरिमा के संदर्भ में गंभीर चिंता का विषय बताया है।


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