आतंकी फंडिंग से जुड़े हैं अनियमित ऑनलाइन गेमिंग एप्स; केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा

feature-top

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को एक अहम हलफनामे में बताया है कि बिना नियमन के तेजी से फैल रहे ऑनलाइन गेमिंग एप्स का सीधा संबंध आतंकवाद की फंडिंग, धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है।

सरकार ने कहा कि ऐसे प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और देश की अखंडता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने इस मामले की सुनवाई आज करने की संभावना जताई है।

सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि अनियंत्रित ऑनलाइन जुए वाले गेम्स के जरिए टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और कई मामलों में आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाए जाने के प्रमाण मिले हैं।

सरकार के अनुसार, यह प्रवृत्ति न केवल आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि परिवारों, समाज और युवाओं पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। हलफनामे में यह भी उल्लेख किया गया कि ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां बड़े पैमाने पर विज्ञापन, सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के जरिए युवाओं और कमजोर तबकों तक आसानी से पहुंच बना रही हैं।

अत्याधुनिक तकनीक, एल्गोरिदम और अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस के कारण इन कंपनियों को राज्य व देश के कानूनों से बच निकलने में आसानी होती है, जिससे इन पर नियंत्रण और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 2025 का ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन कानून लागू किया है, ताकि ऐसे प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण स्थापित किया जा सके और उनके दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सके।


feature-top