आधार सिर्फ जन कल्याण योजनाओं का दस्तावेज़, नागरिकता का नहीं : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि कई घुसपैठियों के पास भी आधार कार्ड मौजूद हैं, लेकिन आधार किसी भी व्यक्ति को नागरिकता या वोट देने का अधिकार स्वतः नहीं देता।

मुख्य न्यायाधीश सुर्याकांन्त की अगुवाई वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि आधार केवल सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ देने के लिए बनाया गया दस्तावेज़ है, न कि नागरिकता का प्रमाण। पीठ ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के आधार पर वोटर सूची में नाम जोड़ने या हटाने की बात आती है, तो आधार सिर्फ एक सहायक दस्तावेज़ माना जाएगा, अंतिम प्रमाण नहीं।

उन्होंने प्रश्न उठाया—“अगर कोई पड़ोसी देश का व्यक्ति मजदूरी करने आता है और उसके पास आधार बन गया, तो क्या उसे वोट देने का अधिकार दे दिया जाए?” सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग केवल पोस्ट ऑफिस नहीं है, बल्कि उसे Form-6 में जमा किए गए दस्तावेजों की सही–गलत जांच का अधिकार है।

पीठ अभी कई राज्यों में चल रही विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।


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