यूज़र-जनरेटेड कंटेंट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूज़र-जनरेटेड कंटेंट को लेकर एक “प्रभावी” नियामक व्यवस्था और एक मज़बूत, स्वतंत्र निगरानी तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह सार्वजनिक परामर्श के बाद चार हफ्तों के भीतर विस्तृत गाइडलाइन तैयार करे।

मुख्य न्यायाधीश  सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने कहा कि मौजूदा कानूनों में एक कानूनी खालीपन है, जिसके चलते ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जाने वाले कंटेंट के लिए किसी भी प्रकार की जवाबदेही तय नहीं हो पाती।

पीठ ने टिप्पणी की“अगर कोई अपनी प्लेटफ़ॉर्म और चैनल बनाता है तो उसकी कोई जवाबदेही क्यों नहीं? ऐसी सामग्री के साथ ज़िम्मेदारी का भाव जुड़ा होना चाहिए। नियम किसी को दबाने के लिए नहीं, बल्कि एक फ़िल्टर की तरह काम करने के लिए होते हैं।

 कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि कंटेंट मॉडरेशन का मुद्दा बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है, खासकर तब जब वीडियो, यूट्यूब और पॉडकास्ट जैसे ऑडियो-विज़ुअल प्लेटफॉर्म पर अनुचित, भड़काऊ या अवैध सामग्री का पता लगाना कठिन हो जाता है। कई बार तकनीकी कंपनियां और सरकारी एजेंसियां भी ऐसे दुरुपयोग को रोकने में विफल रहती हैं।


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