सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण पर स्वतः संज्ञान लिया

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दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि केवल मामले के सूचीबद्ध होने भर से भी वायु गुणवत्ता में सुधार देखा गया है।

उन्होंने कहा कि अब यह आवश्यक है कि इस मुद्दे की नियमित रूप से सुनवाई की जाए, न कि तीन-चार महीने बाद। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक योजनाएं भी सार्वजनिक होना चाहिए।

इन योजनाओं पर चर्चा और उनके अंतिम रूप को सुनिश्चित करना जरूरी है। एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार ने वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी अल्पकालिक योजनाओं पर शपथपत्र दाखिल किया है। इसके साथ ही सभी संबंधित राज्यों और एजेंसियों के साथ बैठकें भी की गई हैं।

अदालत ने केंद्र से सवाल किया कि इन योजनाओं का वास्तविक असर क्या रहा है और क्या कोई ठोस सुधार दर्ज किया गया है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “आपने जो एक्शन प्लान बनाया था, उससे कितनी सकारात्मक प्रगति हुई? हमें यह जानना आवश्यक है। अभी तक तो हमें यह भी स्पष्ट नहीं है कि कौन-कौन से कदम वास्तव में लागू किए गए।”


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