आपराधिक मामले में जमानत के लिए समानता का सिद्धांत ही एकमात्र आधार नहीं : सुप्रीम कोर्ट

feature-top

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी एक अहम टिप्पणी में कहा है कि आपराधिक मामले में आरोपी की जमानत के लिए समानता का सिद्धांत ही एकमात्र आधार नहीं हो सकता।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने हत्या के मामले में आरोपी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आरोपी को इस आधार पर जमानत दी थी कि एक अन्य आरोपी को भी जमानत मिल चुकी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश को पलट दिया। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि जिस कथित अपराध के लिए आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, उसमें शामिल हालात पर पूरा ध्यान दिए बिना जमानत की राहत नहीं दी जा सकती। पीठ ने कहा, 'अक्सर कहा जाता है कि जमानत नियम है, और जेल अपवाद। इस बात पर जितना जोर दिया जाए कम है, लेकिन साथ ही, इसका मतलब यह नहीं है कि जिस अपराध के लिए आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, उसमें हालात पर ध्यान दिए बिना जमानत की राहत दी जाए।'


feature-top