हिंदी न जानने से अलग-थलग नहीं पड़ना चाहते: जस्टिस बी.वी. नागरत्ना

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सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि दक्षिण भारतीय लोग हिंदी न जानने के कारण खुद को अलग-थलग नहीं पाना चाहते। न्यायपालिका में हिंदी के उपयोग पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बात का कोई राजनीतिक अर्थ न निकाला जाए।

उन्होंने कहा कि भारत भाषाई विविधता वाला उपमहाद्वीप है, जहाँ आठवीं अनुसूची में कई भाषाएँ शामिल हैं। दक्षिण भारत में कम-से-कम छह प्रमुख भाषाओं का चलन है और अंग्रेजी इन राज्यों के बीच सेतु का काम करती है।

जस्टिस नागरत्ना ने बताया कि जिला अदालतों में स्थानीय भाषाएँ—जैसे कन्नड़, तमिल—प्रचलित हैं, जबकि संवैधानिक अदालतों में अंग्रेजी आधिकारिक भाषा है।

यह व्यवस्था न्यायाधीशों के विभिन्न उच्च न्यायालयों में स्थानांतरण को संभव बनाती है। उन्होंने कहा कि भाषा के मामले में संतुलन जरूरी है ताकि हिंदी न जानने वाले लोग खुद को अलग-थलग महसूस न करें।


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