सांसदों को पार्टी व्हिप से मुक्त करने का रखा गया प्रस्ताव : कांग्रेस नेता मनीष तिवारी

feature-top

कांग्रेस के वरिष्ठ लोकसभा सदस्य मनीष तिवारी ने सांसदों को विधायी कार्यों के दौरान पार्टी लाइन के बंधन से मुक्त करने की मांग उठाई है। इसके लिए उन्होंने लोकसभा में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया है। यह प्रस्ताव शीतकालीन सत्र के दौरान लाया गया है, जो 19 दिसंबर को समाप्त होने वाला है।

वर्तमान व्यवस्था में प्रत्येक सांसद को अपने दल द्वारा जारी किए गए व्हिप का पालन करना अनिवार्य होता है। इस व्हिप के आधार पर ही सदस्य विभिन्न विधेयकों और प्रस्तावों पर मतदान करते हैं। तिवारी के प्रस्तावित विधेयक में दलों द्वारा थोपे जाने वाले अनिवार्य व्हिप से मुक्ति की बात कही गई है।

इसके लिए उन्होंने दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) में संशोधन का सुझाव दिया है। तिवारी ने इसे “whip-driven tyranny” यानी व्हिप आधारित दमन से छुटकारा दिलाने का प्रयास बताया है। उनका कहना है कि इससे संसद में बेहतर और स्वतंत्र सोच पर आधारित कानून निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ महत्वपूर्ण मामलों—जैसे विश्वास मत, स्थगन प्रस्ताव, मनी बिल, तथा सरकार की स्थिरता को प्रभावित करने वाली अन्य परिस्थितियों—में व्हिप की व्यवस्था लागू रहनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव इस बात को रेखांकित करता है कि लोकतंत्र में सर्वोच्चता किसकी है “उस मतदाता की, जो घंटों धूप में खड़े होकर मतदान करता है, या उस राजनीतिक पार्टी की, जिसका व्हिप एक निर्वाचित प्रतिनिधि को मात्र आदेशपालक बना देता है?”


feature-top