बिलासपुर मेमू ट्रेन हादसा मामले में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आयी सामने

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बीते महीने गतौरा–बिलासपुर सेक्शन में हुई मेमू ट्रेन दुर्घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी हो गई है। मुख्य संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) द्वारा जारी रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि हादसे का मुख्य कारण ट्रेन संचालन में गंभीर त्रुटियां और सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन था।

इस दुर्घटना में लोको पायलट सहित 13 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई थी। रिपोर्ट के अनुसार 68733 गेवरारोड–बिलासपुर मेमू ट्रेन के लोको पायलट मनोवैज्ञानिक (साइको) परीक्षण में अनुत्तीर्ण थे। रेलवे के नियमों के मुताबिक मेमू या ईएमयू जैसी उपनगरीय ट्रेनों को चलाने के लिए साइको टेस्ट पास करना अनिवार्य है।

इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए उन्हें ट्रेन संचालन की जिम्मेदारी दे दी गई। सीआरएस की जांच में यह भी सामने आया कि लोको पायलट के क्षमता प्रमाणपत्र (सक्षमता सर्टिफिकेट) में कई गंभीर खामियां थीं। प्रमाणपत्र निर्धारित प्रारूप में नहीं था, इसमें न तो सेक्शन की अनुमति दर्ज थी और न ही इंजन के प्रकार का उल्लेख किया गया था। रजिस्टर और सर्विस रिकॉर्ड में भी आवश्यक प्रविष्टियों का अभाव पाया गया। इसे रेलवे की गंभीर लापरवाही और सुरक्षा जोखिम बताया गया है।

जांच के दौरान जोन के कुछ अधिकारियों ने दावा किया कि साइको टेस्ट में फेल लोको पायलट भी असिस्टेंट लोको पायलट के साथ ड्यूटी कर सकता है, पर सीआरएस ने इस तर्क को नियमों के पूरी तरह विरुद्ध बताया और खारिज कर दिया।

गौरतलब है कि रेलवे बोर्ड ने 15 अक्टूबर 2024 को स्पष्ट आदेश जारी किया था कि साइको टेस्ट पास किए बिना मेमू ट्रेन संचालन पूर्णत: प्रतिबंधित है। इसके बावजूद संबंधित जोन ने अपने स्तर पर अलग नियम लागू कर दिए, जो हादसे की पृष्ठभूमि में एक बड़ा कारण बन गए।


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