कर्नाटक सरकार ने नफरत फैलाने वाले भाषणों के खिलाफ बिल पेश किया

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कर्नाटक सरकार ने विधानसभा में एक बिल पेश किया है, जिसके बारे में मंत्रियों का कहना है कि यह हाशिए पर पड़े समुदायों के खिलाफ नफरत भरी बातों पर रोक लगाएगा, लेकिन विरोधियों का कहना है कि 10 साल की जेल और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने के प्रावधान के कारण यह सोच और राजनीतिक रैलियों को अपराध बना देगा।

कर्नाटक हेट स्पीच और हेट क्राइम (रोकथाम) बिल को 4 दिसंबर को कैबिनेट ने मंज़ूरी दे दी और गृह मंत्री जी परमेश्वर ने इसे विधानसभा में पेश किया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों के कड़े विरोध के बावजूद कांग्रेस सरकार ने अपना एक अहम वादा पूरा किया।

बिल के अनुसार, कोई भी बात, जिसे बोला जाए, लिखा जाए, छापा जाए या फैलाया जाए, चाहे वह शब्दों में हो, संकेतों में हो, तस्वीरों में हो, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन से हो या किसी और तरीके से, अगर वह सार्वजनिक तौर पर किसी जीवित या मृत व्यक्ति, लोगों के समूह या समुदाय के खिलाफ चोट पहुंचाने, असहमति पैदा करने, दुश्मनी या नफरत या बुरी भावनाएं भड़काने के इरादे से की जाती है, तो वह हेट स्पीच मानी जाएगी।

धर्म, नस्ल, जाति या समुदाय, लिंग, यौन रुझान, जन्म स्थान, निवास, भाषा, विकलांगता या जनजाति के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव को भी हेट स्पीच की कैटेगरी में रखा गया है।


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