अनुच्छेद 21 की सुरक्षा जरूरी, पर राष्ट्रहित सर्वोपरि : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के अधिकार हमेशा राष्ट्र के हित के अधीन होते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों की रक्षा अनिवार्य है, लेकिन जब मामला देश की सुरक्षा या अखंडता से जुड़ा हो, तो ये अधिकार जमानत देने का एकमात्र आधार नहीं बन सकते।

यह टिप्पणी 2010 में पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मिदनापुर स्थित ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस हादसे से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की गई। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ सीबीआई द्वारा उन आरोपियों को मिली जमानत के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिन पर ट्रेन को पटरी से उतारने का आरोप है।

पीठ ने कहा कि इस स्तर पर आरोपियों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है, खासकर तब जब उनके खिलाफ कोई नए सबूत प्रस्तुत नहीं किए गए। अदालत ने माना कि सीबीआई ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं ला सकी जिससे जमानत रद्द करने का ठोस आधार बन सके।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अनुच्छेद 21 के अधिकार सर्वोच्च महत्व रखते हैं, लेकिन न्याय का केंद्र केवल व्यक्ति नहीं हो सकता राष्ट्र का हित और सुरक्षा भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।


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