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भारत में- तेरे टुकड़े हो, ऐसी भाषा नहीं होनी चाहिए : संघ प्रमुख मोहन भागवत
हमारे अपने देश में, हमारे अपने देश की भक्ति होनी चाहिए, यहां- 'तेरे टुकड़े हो' ऐसी भाषा नहीं होनी चाहिए। यह कैसे होता है? पूरा भारत देश को एक मानकर चलता हैं, संविधान भी हमारा यही कहता है। तो इस भारत में छोटी-छोटी बातों को लेकर टकराव कैसे होता है?
यह बात आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आज दक्षिण अंडमान के बेओदनाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कही हैं। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि "कीर्तन स्मरण जो सारी बातें करनी है, अनुकरण के लिए करनी है।
अनुकरण जिसका करना है वह पूर्ण चाहिए, गलत बातों का अनुकरण, गलती करने वाले का करेंगे तो गलत बातों का भी अनुकरण होगा। सावरकर जी का चरित्र देखते हैं तो उनके चरित्र में पूर्णता मिलती है, वर्णन बहुत हुआ है। सब प्रकार की प्रतिभा सावरकर जी के पास थी।
सावरकर जी का वर्णन करना है तो कई विश्लेषण लगते हैं। उनकी कविताओं को देखेंगे तो एक-एक कविता में उनके व्यक्तित्व का पहलू मिलता है। जिस गीत का हम स्मरण कर रहे हैं उस गीत में भक्ति है, प्रेम ,समर्पण, भक्ति के घटक है।
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