राजस्व विभाग में डिजिटल क्रांति: दो वर्षों की उपलब्धियों पर मंत्री टंकराम वर्मा की प्रेस वार्ता

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नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने प्रेस वार्ता कर राजस्व विभाग की बीते दो वर्षों की उपलब्धियों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राजस्व विभाग को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

मंत्री वर्मा ने बताया कि राज्य में एग्रीस्टेक योजना के तहत जियो-रेफरेंसिंग, फार्मर रजिस्ट्रेशन और डिजिटल क्रॉप सर्वे की शुरुआत की गई है। पटवारी नक्शों की जियो-रेफरेंसिंग के लिए 25 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। अब हर भूखंड को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) दिया जाएगा और नागरिकों को भू-आधार कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि धमतरी, जगदलपुर और अंबिकापुर में नक्शा प्रोग्राम के तहत शहरी भूमि सर्वे शुरू हो चुका है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक से सर्वे-रिसर्वे किया जा रहा है।

शहरी क्षेत्रों में 1500 स्केल पर नए नक्शे तैयार किए जाएंगे, जिससे छोटे प्लॉट भी रिकॉर्ड में दर्ज हो सकेंगे। राजस्व मंत्री ने कहा कि अब नामांतरण से लेकर भूमि व्यपवर्तन तक की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। स्व-नामांतरण की सुविधा लागू कर दी गई है और भूमि व्यपवर्तन को सरल व डिजिटल बनाने के लिए 2 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। किसी परियोजना के लिए भूमि चिन्हित होते ही उसकी खरीद-बिक्री, बंटवारा और विनिमय पर रोक लगाई जाएगी, जिससे सरकारी नुकसान को रोका जा सकेगा।

उन्होंने जानकारी दी कि अब 5 डिसमिल से कम भूमि की बिक्री पर प्रतिबंध रहेगा। वहीं छत्तीसगढ़ जन आवास योजना के तहत 2 से 10 एकड़ तक प्लॉटिंग की अनुमति दी गई है। कॉलोनी और अपार्टमेंट की सड़क, गार्डन और सामुदायिक भवन संयुक्त नाम पर दर्ज किए जाएंगे। मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत अब तक करीब 80 हजार से अधिक हितग्राहियों को प्रॉपर्टी कार्ड प्रदान किए जा चुके हैं। शहरी क्षेत्रों में भूमिहीनों को स्थायी और अस्थायी पट्टा देने की प्रक्रिया भी प्रारंभ की जा रही है। किसानों और मजदूरों को मिलने वाले लाभों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के तहत पंजीकृत मजदूरों को 10 हजार रुपए सालाना दिए जा रहे हैं।

साथ ही कृषि कल्याण के लिए 562 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। अंत में मंत्री ने कहा कि राजस्व विभाग में किए गए ये सुधार राज्य के नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।


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