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आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
आवारा कुत्तों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पशु प्रेम और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
अधिवक्ता वंदना जैन की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कोर्ट ने कहा कि पशु प्रेम का अर्थ सभी जानवरों से है, लेकिन किसी व्यक्ति के घर में जानवर रखना उसका निजी विवेक है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यही सिद्धांत गेटेड कम्युनिटी पर भी लागू होता है। किसी गेटेड कॉलोनी में कुत्तों को खुले में घूमने देना है या नहीं, इसका फैसला वहां रहने वाले लोगों को करना चाहिए। कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि 90 प्रतिशत निवासी इसे बच्चों के लिए खतरनाक मानते हैं और 10 प्रतिशत इसके पक्ष में हैं, तो बहुमत की राय को महत्व मिलना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसा प्रावधान होना चाहिए, जिससे गेटेड कम्युनिटी मतदान के जरिए इस तरह के मामलों में निर्णय ले सके।
वहीं अधिवक्ता वंदना जैन ने कोर्ट को बताया कि वे कुत्तों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन बढ़ती कुत्तों की संख्या और सार्वजनिक सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि देश में लगभग 6.2 करोड़ कुत्तों की आबादी है और स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।
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