पॉक्सो कानून के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी

feature-top

सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के व्यापक दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताते हुए संज्ञान लिया।

शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि इस समस्या पर रोक लगाने के लिए कानून में ‘रोमियो–जूलियट’ नियम जोड़े जाएं, ताकि वास्तविक किशोर प्रेम संबंधों को पॉक्सो के कड़े प्रावधानों से बाहर रखा जा सके।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि पॉक्सो मामलों में जमानत के दौरान हाईकोर्ट पीड़िता की उम्र का अनिवार्य मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश नहीं दे सकता।

अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में पहले भी कानून के दुरुपयोग को लेकर न्यायिक संज्ञान लिया जा चुका है। पीठ ने निर्देश दिया कि इस फैसले की एक प्रति भारत सरकार के विधि सचिव को भेजी जाए, ताकि पॉक्सो कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक कदमों पर विचार किया जा सके।

इसमें वास्तविक किशोर प्रेम संबंधों को कानून के दायरे से बाहर रखने के लिए ‘रोमियो–जूलियट’ नियम जोड़ना और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्था करना शामिल है, जो निजी बदले या व्यक्तिगत हिसाब-किताब चुकता करने के लिए इस कानून का दुरुपयोग करते हैं।


feature-top