सरकारी कॉलेज में दाखिला नौकरी की गारंटी नहीं : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी सरकारी कॉलेज में दाखिला मिल जाना अपने आप में सरकारी नौकरी पाने का अधिकार नहीं देता। यदि विज्ञापन या नीति में नियुक्ति की कोई स्पष्ट गारंटी नहीं है, तो केवल प्रवेश के आधार पर नौकरी की मांग नहीं की जा सकती।

आयुर्वेदिक स्टाफ नर्स की नियुक्ति से जुड़े मामले में जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की अपील स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में “वैध अपेक्षा” का सिद्धांत लागू नहीं होता, क्योंकि समय के साथ सरकारी नीति और चयन प्रक्रिया में बदलाव हो चुका है।

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि भेदभाव तभी माना जाएगा जब समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों के साथ अलग व्यवहार हो। यहां ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सरकारी कॉलेज में दाखिला मात्र से सरकारी नौकरी का अधिकार स्वतः उत्पन्न नहीं होता।


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