आरटीई में लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के बच्चों को शिक्षा में प्रवेश देना एक “राष्ट्रीय मिशन” होना चाहिए।

कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि वे निजी गैर-अल्पसंख्यक, अनुदान-रहित स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए स्पष्ट नियम और विनियम तैयार करें।

न्यायमूर्ति पी.एम. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि ईडब्ल्यूएस बच्चों को प्रवेश देना सरकार और स्थानीय प्राधिकरण की जिम्मेदारी है।

साथ ही अदालतों को भी ऐसे मामलों में अभिभावकों को त्वरित और प्रभावी राहत देने के लिए “एक कदम आगे” बढ़ना चाहिए। यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें शिकायत थी कि वर्ष 2016 में सीटें उपलब्ध होने के बावजूद बच्चों को आरटीई के तहत पड़ोस के स्कूल में प्रवेश नहीं मिला।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, डिजिटल निरक्षरता, भाषा संबंधी बाधाएं, हेल्पडेस्क की कमी और शिकायत निवारण की अस्पष्ट व्यवस्था के कारण आरक्षित सीटें जरूरतमंद बच्चों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।


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