233 साल पुरानी वाल्मीकि रामायण की पांडुलिपि अयोध्या के राम कथा संग्रहालय को भेंट की गई

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संस्कृति मंत्रालय ने बताया कि वाल्मीकि रामायण की एक दुर्लभ 233 साल पुरानी संस्कृत पांडुलिपि अयोध्या के राम कथा संग्रहालय को गिफ्ट की गई है।

मंत्रालय ने बताया कि एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक आदान-प्रदान में, सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर श्रीनिवास वरखेड़ी ने वाल्मीकिरामायणम (तत्वदीपिका टीका के साथ) की पांडुलिपि प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा को भेंट करी। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि आदि कवि वाल्मीकि द्वारा लिखी गई और महेश्वरा तीर्थ की क्लासिकल कमेंट्री (टीका) वाली यह पांडुलिपि संस्कृत भाषा में (देवनागरी लिपि में) लिखी गई है।

इसमें कहा गया है कि पांडुलिपि, जो पहले राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली को उधार दी गई थी, अब अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय (अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय), अयोध्या, उत्तर प्रदेश को स्थायी रूप से उपहार में दे दी गई है।


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