हर कोई खुद को नहीं लिख सकता शंकराचार्य : सीएम योगी

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मुख्यमंत्री ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी पद की गरिमा नियम और परंपरा से तय होती है।

उन्होंने कहा, “क्या कोई भी व्यक्ति अपने को मुख्यमंत्री, मंत्री या किसी दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष बताकर प्रदेश में घूम सकता है? एक व्यवस्था है, एक प्रणाली है और सबको उसका पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में सर्वोच्च और अत्यंत सम्मानित माना जाता है, लेकिन हर काम विधि-विधान और मान्यता के अनुसार ही होता है।

विद्वत परिषद द्वारा अधिकृत व्यक्ति ही शंकराचार्य बन सकता है, “हर कोई स्वयं को शंकराचार्य नहीं लिख सकता है।”


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