- Home
- DPR Chhattisgarh
- लाल आतंक का अंत, गोगुंडा में पहली बार पहुचीं बिजली
लाल आतंक का अंत, गोगुंडा में पहली बार पहुचीं बिजली
सुकमा की दुर्गम वादियों में करीब 650 मीटर की ऊंचाई पर बसा गोगुंडा गांव सोमवार को विकास के नए अध्याय का साक्षी बना। आजादी के 78 वर्षों बाद इस पहाड़ी गांव में पहली बार बिजली का बल्ब जला। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संभव हुई यह पहल केवल विद्युतीकरण नहीं, बल्कि चार दशकों से पसरे लाल आतंक के अंधेरे पर निर्णायक प्रहार के रूप में देखी जा रही है।
कल तक सूरज ढलते ही यह गांव घने जंगलों और नक्सली खौफ के सन्नाटे में डूब जाता था। ढिबरी और टॉर्च की टिमटिमाती रोशनी में जीवन गुजारने वाले ग्रामीण अब अपने घरों में जगमगाते बल्ब देख भावुक हैं। बच्चों की पढ़ाई अब अंधेरे की मोहताज नहीं, और महिलाओं के चेहरे पर सुरक्षा व आत्मविश्वास की नई चमक साफ दिखाई दे रही है। *जीते जी गांव में बिजली देख ली* गांव के बुजुर्ग माड़वी सुक्का ने नम आंखों से कहा, “कभी सोचा नहीं था कि अपने जीते जी गांव में बिजली देख पाएंगे। अब लगता है कि हमारा गांव भी देश के नक्शे पर है।”
यह एक वाक्य गोगुंडा की दशकों की प्रतीक्षा और पीड़ा का सार बयान करता है। *सुरक्षा की ढाल, विकास की राह* यह परिवर्तन अचानक नहीं आया। सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के समन्वित प्रयासों ने यहां हालात बदले। 74वीं बटालियन के कमांडेंट हिमांशु पांडे के अनुसार, नक्सली प्रभाव के कारण यह गांव वर्षों तक विकास से वंचित रहा। संयुक्त अभियान के बाद स्थापित कैंप ने नक्सलियों के ‘सुरक्षित ठिकाने’ को ध्वस्त किया और विकास कार्यों का मार्ग प्रशस्त किया। जहां पहले पांच घंटे पैदल पहाड़ चढ़कर पहुंचना पड़ता था, वहां अब विकास की गाड़ियां पहुंच रही हैं।
कैंप स्थापित होते ही कलेक्टर अमित कुमार के नेतृत्व में स्कूल, आंगनबाड़ी और राशन दुकान जैसी बुनियादी सुविधाएं युद्ध स्तर पर शुरू की गईं। *अंतिम छोर तक पहुंचेगी रोशनी* कलेक्टर ने कहा कि गोगुंडा में बिजली पहुंचना सामाजिक और आर्थिक बदलाव की शुरुआत है। हमारा लक्ष्य जिले के अंतिम छोर तक बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा पहुंचाना है। सुरक्षा और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। गोगुंडा अब सुरक्षित है और यहां जल्द ही पुल-पुलियों का जाल बिछेगा। *बस्तर की बदलती तस्वीर* गोगुंडा की यह रोशनी बस्तर के बदलते स्वरूप का प्रतीक बन गई है। यह उस जज्बे की कहानी है, जिसने पहाड़ों का सीना चीरकर बिजली के खंभे गाड़े और उस भरोसे की, जो दशकों बाद लोकतंत्र के प्रति फिर मजबूत हुआ। अब गोगुंडा में अंधेरा अतीत बन चुका है। पहाड़ियों पर जला यह बल्ब केवल रोशनी नहीं, बल्कि उम्मीद, विश्वास और नए भविष्य की चमक का प्रतीक है।
About Babuaa
Categories
Contact
0771 403 1313
786 9098 330
babuaa.com@gmail.com
Baijnath Para, Raipur
© Copyright 2019 Babuaa.com All Rights Reserved. Design by: TWS
