मध्य प्रदेश में 77 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन वक्फ के रूप में पंजीकृत: CAG

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मध्य प्रदेश में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने राज्य भर में वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया। विधानसभा में पेश की गई 2018 से 2023 की अवधि की अनुपालन लेखापरीक्षा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 20 जिलों में 77.07 करोड़ रुपये की सरकारी भूमि को वक्फ के रूप में पंजीकृत किया गया था। लेखापरीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, यह व्यवस्थागत खामियों और प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण हुआ।

सीएजी ने 81 वक्फ संपत्तियों की जांच की और पाया कि उनमें से 33, यानी 41 प्रतिशत, वास्तव में सरकारी स्वामित्व वाली भूमि थीं। कुल 2,09,639.48 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाली इन संपत्तियों को राजस्व अभिलेखों में राज्य सरकार की संपत्ति और सामुदायिक उद्देश्यों के लिए आरक्षित के रूप में दर्ज किया गया था। इसके बावजूद, इन्हें वक्फ रजिस्टर में दर्ज किया गया था। लेखापरीक्षा रिपोर्ट में पाया गया कि पंजीकरण पूरा होने से पहले जिला कलेक्टरों को सूचित कर दिया गया था, फिर भी अधिकांश मामलों में इस प्रक्रिया को रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। सीएजी ने इसे एक ढुलमुल रवैया बताया, जिसने वक्फ अधिनियम के दुरुपयोग और सरकारी भूमि के अनियमित रूपांतरण को बढ़ावा दिया।

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