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न्यायालयों के आधुनिकीकरण और निःशुल्क विधिक सहायता पर सरकार का विशेष फोकस: 1221 करोड़ रूपए से अधिक का बजट प्रावधान
रायपुर, 13 मार्च 2026/ विधि एवं विधायी कार्य मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने राज्य की न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाए रखने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत 1221 करोड़ 26 लाख 45 हजार रुपये का बजट मांग विधानसभा में प्रस्तुत किया, जिसे सदन ने पारित कर दिया। विधि मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने बताया कि न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए, अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत राज्य सरकार द्वारा विभिन्न स्थानों पर न्यायालय भवनों तथा न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के आवासों के निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 88 करोड़ 63 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
विधि एवं विधायी कार्य मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने बताया कि राज्य में न्यायालयों के आधुनिकीकरण की दिशा में न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है, जिसके लिए इस वित्त वर्ष में 15 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। न्यायपालिका के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों तथा तालुका विधिक सेवा समितियों के माध्यम से विभिन्न योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य विचाराधीन बंदियों, महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के जरूरतमंद लोगों तक न्याय पहुंचाना है। इन योजनाओं के संचालन के लिए 2 करोड़ 50 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है तथा ए.डी.आर. सेंटर के निर्माण के लिए 2 करोड़ 40 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
मंत्री श्री यादव ने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, महिलाओं, बच्चों तथा विचाराधीन बंदियों सहित पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाती है। वर्ष 2025 में कुल 94 हजार 959 पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क एवं सक्षम विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में माननीय उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ बिलासपुर से संबंधित व्यवस्थाओं के लिए 100 नवीन पदों के सृजन हेतु 9 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त जगदलपुर में नवीन एन.आई.ए. कोर्ट की स्थापना के लिए एक करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
श्री यादव ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में विभिन्न न्यायालयों में नए पदों का सृजन भी किया गया है, जिनमें व्यवहार न्यायालय धमधा (दुर्ग) के लिए 06 पद, जिला न्यायालय बेमेतरा के लिए 06 पद, जिला न्यायालय महासमुंद के लिए 55 पद, जिला न्यायालय बिलासपुर के लिए 18 पद, जिला न्यायालय पंखाजूर-कांकेर के लिए 07 पद, जिला न्यायालय कोरबा के लिए 09 पद, जिला न्यायालय जगदलपुर के लिए 06 पद तथा जिला न्यायालय जांजगीर-चांपा के लिए 03 पद शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सिविल जिला न्यायालय दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा (अम्बिकापुर) एवं बस्तर (जगदलपुर) में 40 विभिन्न पदों के सृजन तथा प्रत्येक जिला न्यायालय में एक-एक अनुवादक का पद के मान से कुल 23 पदों के सृजन हेतु 10 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
विधि एवं विधायी कार्य मंत्री श्री यादव ने बताया कि आर्थिक या अन्य कारणों से न्याय से वंचित लोगों को आपराधिक मामलों में सक्षम एवं प्रभावी निःशुल्क कानूनी सेवा प्रदान करने के लिए एक करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को अंतर्राष्ट्रीय मूट-कोर्ट प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए एक करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही विश्वविद्यालय के स्थापना व्यय के लिए 13 करोड़ 50 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। यह बजट राज्य में न्यायिक अधोसंरचना को मजबूत करने, न्यायालयों के आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने तथा समाज के कमजोर वर्गों तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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