मारुति सुजुकी के खिलाफ मामले में एक व्यक्ति ने भ्रूण को अदालत में पेश किया

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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने को याचिकाकर्ता द्वारा गर्भपात हुए भ्रूण को अदालत में लाने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए 200 करोड़ रुपये के मुआवजे की याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्यवाही को भावनात्मक प्रदर्शन का मंच नहीं बनाया जा सकता, और इस बात पर जोर दिया कि न्याय केवल कानून और सबूतों के आधार पर दिया जाता है, न कि सहानुभूति या नाटकीयता के आधार पर।

याचिकाकर्ता दयाशंकर पांडे ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उन्होंने मारुति सुजुकी से जुड़े 200 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े पैमाने पर गबन का पर्दाफाश किया था, जिसके परिणामस्वरूप उन पर और उनके परिवार पर बार-बार हमले हुए। उन्होंने दावा किया कि ऐसी ही एक घटना के कारण उनकी पत्नी का गर्भपात हो गया, जबकि इससे पहले आगजनी से संबंधित एक हमले में उनकी बेटी गंभीर रूप से घायल हो गई और स्थायी रूप से विकलांग हो गई। इन घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कथित गबन की गई राशि, अपनी बेटी के चिकित्सा उपचार के लिए मुआवजे के रूप में 82 लाख रुपये की वसूली और निष्पक्ष पुलिस जांच के निर्देश की मांग करी ।


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