दिल्ली विश्वविद्यालय में ‘भगत सिंह की बौद्धिक विरासत और क्रांतिकारी आंदोलन’ पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

feature-top

इतिहास विभाग और IQAC, श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय तथा कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग, दिल्ली सरकार के सहयोग से दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी "भगत सिंह की बौद्धिक विरासत और क्रांतिकारी आंदोलन" का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. सेमिनार का प्रारंभ उद्घाटन सत्र के साथ हुआ जिसमें विशिष्ट अतिथि के रूप में कला संस्कृति एवं भाषा विभाग, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली सरकार में संयुक्त सचिव श्री नागेंद्र एस.पी. त्रिपाठी जी रहे. उन्होंने सेमिनार को युवाओं के बीच शहीद भगत सिंह के व्यक्तित्व एवं चिंतन को समझने का एक महत्वपूर्ण साधन बताया. विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ. पहले समानांतर सत्र के अंतर्गत मुख्य वक्ता के तौर पर प्रो. संतोष कुमार राय जी ने विषय "सरदार अजीत सिंह की बौद्धिक विरासत और भारतीय प्रवासी क्रांतिकारी आंदोलन" पर अपना सारगर्भित वक्तव्य दिया. इसी के साथ पहले दिन शहीद भगत सिंह के विचार और चिंतन पर आधारित एक पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन छात्राओं के लिए किया गया. दो दिवसीय संगोष्ठी में कुल 12 तकनीकी सत्र रहे. जिसमें विभिन्न महाविद्यालयों के छात्रों, शोधार्थी एवं संकाय सदस्यों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए. सेमिनार के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिरुद्ध देशपांडे शामिल हुए. इस दौरान शहीद भगत सिंह के जीवन से जुड़े अनछुए पहलुओं पर इतिहास विभाग की छात्राओं द्वारा नाट्य प्रस्तुति एवं देशभक्ति नृत्य की प्रस्तुति हुई. इसी के साथ भगत सिंह पर केंद्रित डॉक्यूमेंट्री 'इंकलाब' की स्क्रीनिंग हुई. मुख्य अतिथि प्रो. अनिरुद्ध देशपांडे ने शहीद भगत सिंह के जीवन एवं चिंतन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपनी बात विस्तार से रखते हुए समकालीन दौर में भगत सिंह के विचारों की प्रासंगिकता को समझाया. प्राचार्या प्रो. नीलम गोयल जी ने इस सेमिनार को महत्वपूर्ण बताते हुए भगत सिंह के योगदान को याद रखे जाने की आवश्यकता पर बल दिया. इस संगोष्ठी के संयोजक डॉ. विकास मलिक, सह संयोजक डॉ. विजय कुमार, सचिव डॉ. चयनिका उनियाल, समन्वयक डॉ. सुप्रिया सिन्हा रहीं. उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. वंदना तथा समापन सत्र का संचालन डॉ. सुप्रिया सिन्हा ने सफलतापूर्वक किया. इस दौरान बड़ी संख्या में प्राध्यापक, संकाय सदस्य, शोधार्थी एवं छात्राएं उपस्थित रहे.


feature-top
feature-top