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रायगढ़ : नए कानून के अंतर्गत भूमि विवाद पर पुलिस को मिला कार्यवाही का अधिकार
अवैध कब्जाधारी पर प्राथमिकी दर्ज करने और सजा की कार्यवाही से बनेगा खौफ
आए दिन अखबार की सुर्खियों में समाचार रहते हैं कि लोग बेखौफ निजी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं, सरकारी जमीन को बेच रहे हैं ,फर्जी कागजात तैयार कर जबरन लोगों कि भूमि हड़प रहे हैं,और न जाने कितने मामले मुकदमे प्रतिदिन विभिन्न न्यायालयों में दाखिल हो रहे हैं। एसे मामलों में राजस्व विभाग का मैदानी अमला भी कई मामलों में संदिग्ध भूमिका में नजर आता है । इन मामलों में कमी लाने के उद्देश्य से नए कानून बी एन एस एस 2023 और बी एन एस 2023 के अंतर्गत पुलिस को व्यापक रूप से कार्यवाही करने एवं हस्तक्षेप के अधिकार दिए गए हैं ।
परंतु पुलिस आज भी पुराने परंपरा पर काम कर रही है वह भूमि विवाद पर धारा 174 के अंतर्गत पुलिस हस्तक्षेप अयोग्य अपराध की सूचना दर्ज करते हुए पीड़ित को न्यायालय जाने की समझाइए देकर फैना जारी कर देती है। जबकि बी एन एस 2023 के अंतर्गत उन्हें व्यापक अधिकार दिए गए हैं जिसमें वे ऐसे अवैधानिक कृत्य को रोकने और ऐसे व्यक्ति और साथ देने वाले शासकीय कर्मचारी पर कार्यवाही करने का अधिकार रखते हैं।
यदि हमारे जिले में भी पुलिस द्वारा ऐसा एक भी अपराध रोक दिया जाता है तो बाकी अपराधियों में एक खौफ का वातावरण तैयार होगा और वे लोग किसी भी व्यक्ति की निजी भूमि या सरकारी भूमि पर कब्जा करने से पहले 10 बार सोचेंगे। परंतु अभी उन्हें यह पता है की पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करेगी और माननीय न्यायालय में वह किसी भी तरह इस मुद्दे को कई वर्षों तक लटका कर रखेंगे जिससे थक हार कर पीड़ित पक्ष या तो चुप बैठ जाएगा या उनसे समझौता करेगा और अपनी जमीन औने पौने दाम पर हमें ही बेचेगा। परंतु यदि एक भी अपराधी को ऐसे मामले में सजा होती है तो आने वाले दिनों में ऐसे अपराधियों में खौफ का वातावरण बनेगा और आज जिस तरह कबाड़, जुआ सट्टा, अवैध शराब, पशु तस्करी, पर लगाम कसी गई है इस तरह इन भू माफिया कब्जाधारियों पर भी नकेल कसी जा सकेगी।
अब देखना यह है की पुलिस अपने अधिकारों का उपयोग करके जनता को राहत पहुंचती है या फिर अपने फैना काटने की पारंपरिक विधा को अपनाते हुए ऐसे मामलों से पल्ला झाड़ लेती है। उल्लेखनीय है कि आज से कुछ माह पूर्व भी रायगढ़ की एक व्यापारिक संस्था प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रियल एसोसिएशन रायगढ़ ने माननीय मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर उनसे ऐसे मामलों में कार्यवाही करने हेतु एक पृथक पुलिस दस्ता तैयार करने का आग्रह किया था। जिसमें पुलिस के साथ-साथ राजस्व विभाग एवं सेवाभावी अधिवक्ता व गणमान्य नागरिक भी शामिल हो, ताकि इस गंभीर अपराध पर रोक लगाई ज सके। परंतु अभी तक शासन स्तर पर भी ऐसे निर्णय की प्रतीक्षा की जा रही है।
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आए दिन अखबार की सुर्खियों में समाचार रहते हैं कि लोग बेखौफ निजी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं, सरकारी जमीन को बेच रहे हैं ,फर्जी कागजात तैयार कर जबरन लोगों कि भूमि हड़प रहे हैं,और न जाने कितने मामले मुकदमे प्रतिदिन विभिन्न न्यायालयों में दाखिल हो रहे हैं। एसे मामलों में राजस्व विभाग का मैदानी अमला भी कई मामलों में संदिग्ध भूमिका में नजर आता है । इन मामलों में कमी लाने के उद्देश्य से नए कानून बी एन एस एस 2023 और बी एन एस 2023 के अंतर्गत पुलिस को व्यापक रूप से कार्यवाही करने एवं हस्तक्षेप के अधिकार दिए गए हैं । परंतु पुलिस आज भी पुराने परंपरा पर काम कर रही है वह भूमि विवाद पर धारा 174 के अंतर्गत पुलिस हस्तक्षेप अयोग्य अपराध की सूचना दर्ज करते हुए पीड़ित को न्यायालय जाने की समझाइए देकर फैना जारी कर देती है। जबकि बी एन एस 2023 के अंतर्गत उन्हें व्यापक अधिकार दिए गए हैं जिसमें वे ऐसे अवैधानिक कृत्य को रोकने और ऐसे व्यक्ति और साथ देने वाले शासकीय कर्मचारी पर कार्यवाही करने का अधिकार रखते हैं। यदि हमारे जिले में भी पुलिस द्वारा ऐसा एक भी अपराध रोक दिया जाता है तो बाकी अपराधियों में एक खौफ का वातावरण तैयार होगा और वे लोग किसी भी व्यक्ति की निजी भूमि या सरकारी भूमि पर कब्जा करने से पहले 10 बार सोचेंगे। परंतु अभी उन्हें यह पता है की पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करेगी और माननीय न्यायालय में वह किसी भी तरह इस मुद्दे को कई वर्षों तक लटका कर रखेंगे जिससे थक हार कर पीड़ित पक्ष या तो चुप बैठ जाएगा या उनसे समझौता करेगा और अपनी जमीन औने पौने दाम पर हमें ही बेचेगा। परंतु यदि एक भी अपराधी को ऐसे मामले में सजा होती है तो आने वाले दिनों में ऐसे अपराधियों में खौफ का वातावरण बनेगा और आज जिस तरह कबाड़, जुआ सट्टा, अवैध शराब, पशु तस्करी, पर लगाम कसी गई है इस तरह इन भू माफिया कब्जाधारियों पर भी नकेल कसी जा सकेगी। अब देखना यह है की पुलिस अपने अधिकारों का उपयोग करके जनता को राहत पहुंचती है या फिर अपने फैना काटने की पारंपरिक विधा को अपनाते हुए ऐसे मामलों से पल्ला झाड़ लेती है। उल्लेखनीय है कि आज से कुछ माह पूर्व भी रायगढ़ की एक व्यापारिक संस्था प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रियल एसोसिएशन रायगढ़ ने माननीय मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर उनसे ऐसे मामलों में कार्यवाही करने हेतु एक पृथक पुलिस दस्ता तैयार करने का आग्रह किया था। जिसमें पुलिस के साथ-साथ राजस्व विभाग एवं सेवाभावी अधिवक्ता व गणमान्य नागरिक भी शामिल हो, ताकि इस गंभीर अपराध पर रोक लगाई ज सके। परंतु अभी तक शासन स्तर पर भी ऐसे निर्णय की प्रतीक्षा की जा रही है।
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