'चूहों ने रिश्वत की रकम खा ली': बिहार के अधिकारी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली

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सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार की एक अधिकारी को रिश्वत लेने के आरोप में दोषी पाए जाने पर फैसला रोक दिया। अभियोजन पक्ष के अपने रिकॉर्ड के अनुसार, मामले के केंद्र में जब्त किए गए नोटों को चूहों द्वारा खाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त किया।

न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी के पद पर कार्यरत अरुणा कुमारी को जमानत दे दी और उनकी सजा पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई बाद में की जाएगी।

पीठ ने कहा, "हमें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि नोटों को चूहों ने नष्ट कर दिया। इससे राज्य को राजस्व का भारी नुकसान हुआ है और ऐसी घटनाओं पर सवाल उठते हैं।"

अदालत ने कहा कि नोटों को नष्ट करने का जो स्पष्टीकरण दिया गया वह विश्वसनीय नहीं लगा।

कुमारी पर 10,000 रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप था। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। निचली अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन पटना उच्च न्यायालय ने उस फैसले को पलट दिया और उन्हें कारावास की सजा सुनाई।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्वीकार किया था कि जब्त किए गए नोटों को सबूत के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्हें चूहों ने नष्ट कर दिया था, लेकिन अदालत ने माना कि रिश्वत की रकम जमा करने का रिकॉर्ड संपत्ति कक्ष रजिस्टर में दर्ज होना ही दोषसिद्धि को बरकरार रखने के लिए पर्याप्त है। अदालत ने कहा कि नोटों की भौतिक उपस्थिति मात्र से अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर नहीं होता।


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