'बिजे-मूल' और 'नारंगी पीपल का पेड़'... बाबुल सुप्रियो के फेसबुक पोस्ट ने बढ़ाई बंगाल की सियासी गर्मी

feature-top

तृणमूल कांग्रेस (TMC) और बागी नेताओं के बीच जारी राजनीतिक खींचतान के बीच, राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए साफ किया है कि वे ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं और उनकी स्थिति को लेकर की जा रही अटकलें बेबुनियाद हैं।

बाबुल सुप्रियो के सोशल मीडिया पोस्ट की मुख्य बातें

"मैं जहां हूं, वहीं हूं": सुप्रियो ने साफ किया कि वह पूरी तरह से TMC प्रमुख ममता बनर्जी के पक्ष में हैं और वे एक्टिव पॉलिटिक्स (Active Politics) छोड़ने के बावजूद राज्यसभा के जरिए बंगाल के लिए काम करने की राह दिखाते हैं।

बागी नेताओं पर 'नारंगी पीपल के पेड़' का तंज: उन्होंने चुनाव में हार के बाद पाला बदलने वाले नेताओं पर कटाक्ष किया। सुप्रियो ने लिखा कि वे हैरान हैं कि कैसे ये सभी नेता 4 मई की शाम को या उसके ठीक बाद एक बड़े नारंगी रंग के पीपल के पेड़ (BJP का सिंबल) के नीचे 'ज्ञान' (Enlightenment) प्राप्त करना चाहते हैं।

भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख: वे उन नेताओं पर भी असर डालने वाले साधा जो भ्रष्टाचार में लिपटे थे। उन्होंने कहा कि वे जनता के पैसे की चोरी करने वालों का बचाव नहीं करेंगे और उन्हें जेल में होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि बीजेपी में जाने वाले नेताओं को कैसे पाक-साफ मान लिया जाता है।

'बिजे-मूल' (Bije-Mool) का उदय: सुप्रियो ने बंगाल की मौजूदा अदला-बदली वाली राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा लगता है मानो बंगाल में एक नई पार्टी 'बिजे-मूल' खड़ी हो रही है, जहां यह पहचानना मुश्किल है कि कौन किस पार्टी का मूल नेता है।

भविष्य की योजना: उन्होंने घोषणा की कि वे आगे इस मामले पर मीडिया को कोई इंटरव्यू नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि वे आएंगे "शांति, एकांत और संगीत" पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

भूमिका और विवाद की वजह
यह पोस्ट पश्चिम बंगाल के बदलते राजनीतिक परिदृश्य और समुदायों के बागी नेताओं तथा संरचनाओं दल के बीच जारी रुख बयानबाजी के बीच आया है। इससे पहले भी बाबुल सुप्रियो ने बागी नेताओं को 'सांप' बनाकर निर्देशित किया था और ममता बनर्जी के सबसे कठिन दौर में उनके साथ वफादारी निभाने का वादा किया था।


feature-top
feature-top
feature-top