छत्तीसगढ़ का गौरव : रायपुर के शरद ने फतह किया 18,572 फीट ऊंचा 'श्रीखंड कैलाश'

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के रहने वाले शरद उपाध्याय ने देश के सबसे ऊंचे और दुर्गम ट्रेक में से एक 'श्रीखंड कैलाश' (श्रीखंड महादेव) की चढ़ाई कर एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। समुद्र तल से लगभग 18,572 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित इस कैलाश शिखर तक पहुंचने के लिए उन्होंने 5 रात और 6 दिनों का कठिन सफर तय किया।

चंडीगढ़ से शुरू हुआ सफर

शरद उपाध्याय ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए ट्रैकर्स के साथ उनका यह सफर रायपुर से शुरू हुआ। रायपुर से चंडीगढ़ पहुंचने के बाद वे शिमला होते हुए कुल्लू जिले के 'जाओ' (Jau) गांव पहुंचे, जहां से इस बेहद कठिन ट्रैकिंग की शुरुआत हुई। यात्रा के पहले दिन उन्होंने जाओ गांव से करीब 13 किलोमीटर की चढ़ाई पूरी कर 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित 'थाचू' (Tharchu) बेस कैंप में अपना पहला पड़ाव डाला। इसके बाद वे कालीटॉप और खुसना होते हुए 'भीमद्वारी' (3,710 मीटर) पहुंचे।

90 डिग्री की सीधी चढ़ाई और कम ऑक्सीजन की चुनौती

श्रीखंड कैलाश की इस यात्रा को पांच कैलाशों में से सबसे कठिन माना जाता है। शरद ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि 'भीमद्वारी' से 'पार्वती बाग' और 'नैनसरोवर' होते हुए श्रीखंड महादेव तक का आखिरी 4 किलोमीटर का सफर सबसे ज्यादा खतरनाक था। यहां 90 डिग्री की बिल्कुल सीधी खड़ी चढ़ाई है, जहां ट्रैकर्स को रस्सियों के सहारे आगे बढ़ना पड़ता है। इतनी ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम हो जाता है, जिससे सांस लेने में भारी दिक्कत आती है। हालांकि, आपातकालीन स्थिति के लिए वे अपने साथ ऑक्सीजन सिलेंडर भी ले गए थे।

शरद का तीसरा कैलाश ट्रेक

अदम्य साहस के धनी शरद उपाध्याय की यह तीसरी कैलाश यात्रा है। इससे पहले वे सफलतापूर्वक 'किन्नौर कैलाश' और 'आदि कैलाश' की कठिन चढ़ाई भी पूरी कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि यह यात्रा उन्होंने आधिकारिक तौर पर सरकारी यात्रा (जो जुलाई में शुरू होती है) से पहले स्थानीय ट्रैकिंग कंपनी 'एल्टीट्यूड क्लाइंबर' के सहयोग से पूरी की है। इतनी विषम परिस्थितियों और हाड़ कंपाने वाली ठंड के बीच इस दुर्गम चोटी पर तिरंगा और शिवध्वज फहराकर शरद ने पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है।


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