पश्चिम बंगाल : विधानसभा ने OBC संशोधन बिल पास किया, 77 मुस्लिम समुदायों को लिस्ट से हटाया

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पश्चिम बंगाल विधानसभा ने दो महत्वपूर्ण संशोधन बिल पास किए हैं, जो कलकत्ता हाई कोर्ट के मई 2024 के ऐतिहासिक फैसले को कानूनी रूप प्रदान करते हैं। इन विधेयकों के जरिए राज्य के अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण ढांचे और नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। 

विधानसभा में पारित द वेस्ट बंगाल बैकवर्ड क्लासेस (सर्विस और पोस्ट में रिक्तियों का आरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 और पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन विधेयक, 2026 से जुड़े मुख्य बिंदु :

1. OBC आरक्षण कोटा 17% से घटकर 7% हुआ

  • कोटे में कटौती: पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के समय बढ़ाए गए 17% कुल OBC आरक्षण को घटाकर अब वापस 7% कर दिया गया है 
  • पुरानी श्रेणियां समाप्त: पहले लागू 'OBC-A' (10% कोटा - मुख्य रूप से अधिक पिछड़े वर्ग) और 'OBC-B' (7% कोटा - पिछड़े वर्ग) के विभाजन को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। 
  • 66 मूल समुदायों की बहाली: नए संशोधनों के तहत केवल उन 66 मूल जातियों/समुदायों को ही OBC सूची में वैध रखा गया है, जो वर्ष 2010 से पहले (वाम मोर्चा सरकार के समय) इस सूची में शामिल थीं। 

2. मुस्लिम उप-जातियों को सूची से बाहर किया गया

  • अवैध घोषणा का पालन: कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2010 के बाद जोड़ी गई 77 जातियों (जिनमें अधिकांश मुस्लिम उप-जातियां थीं) के वर्गीकरण को असंवैधानिक बताया था। इस कानून के जरिए उन सभी अतिरिक्त मुस्लिम उप-जातियों को आधिकारिक रूप से सूची से हटा दिया गया है 
  • अधिकारों का संरक्षण: हालांकि कोर्ट के निर्देशानुसार, जिन लोगों ने 2010 के बाद जारी प्रमाणपत्रों के आधार पर पहले ही सरकारी नौकरियां प्राप्त कर ली हैं, उनकी नौकरियां सुरक्षित रहेंगी। 

3. पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1993 में संशोधन

  • आयोग को वापस मिली शक्ति: अब कोई भी नागरिक पिछड़ा वर्ग सूची में शामिल होने के लिए सीधे आवेदन कर सकता है, जिसकी पूरी जांच पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग करेगा। 
  • गलत समावेशन पर शिकायत: आम जनता किसी जाति के गलत समावेशन (Over-inclusion) या वंचित रहने (Under-inclusion) के खिलाफ आयोग में शिकायत दर्ज करा सकती है। सरकार आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही आगे का निर्णय लेगी। 
  • कार्यकाल का निर्धारण: आयोग के सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्ष तय किया गया है, जबकि इसके सदस्य-सचिव (जो एक कार्यरत सरकारी अधिकारी होंगे) के कार्यकाल का फैसला राज्य सरकार करेगी l


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