सीजेपी आंदोलन : अस्पताल की रिपोर्ट से झूठा साबित हुआ दिल्ली पुलिस का दावा!

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जंतर-मंतर पर सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिसिया कार्रवाई को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन (छर्रों) के इस्तेमाल से साफ इनकार किए जाने के बाद, अब राजधानी के दो बड़े सरकारी अस्पतालों की मेडिकल रिपोर्ट ने पुलिस के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि घायल छात्रों के शरीर में गंभीर चोटें पैलेट लगने के कारण ही आई हैं।

पुलिस का दावा बनाम अस्पताल की रिपोर्ट

दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन या नुकीले डंडों के इस्तेमाल की खबरों को "पूरी तरह से झूठा, भ्रामक और अफवाह" बताया था। पुलिस ने सोशल मीडिया पर इस तरह के दावों को साझा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।

हालांकि, अस्पतालों से आई मेडिकल रिपोर्ट्स और डॉक्टरों के बयान पुलिस के इस रुख के ठीक विपरीत हैं:

  • एम्स ट्रॉमा सेंटर (AIIMS): प्रदर्शन में शामिल छात्र साहिल लोचब की दाईं आंख में पैलेट लगने के कारण गहरी चोट आई है। डॉक्टरों के अनुसार, छात्र की आंख की रोशनी जाने का गंभीर खतरा बना हुआ है, जिसके चलते उसकी आपातकालीन सर्जरी की गई है।
  • एलएचएमसी अस्पताल (LHMC): अस्पताल के ईएनटी (ENT) वार्ड में भर्ती एक अन्य घायल युवक, शेख इरशाद मंसूरी के शरीर, गर्दन और आंख के पास से डॉक्टरों ने दो अलग-अलग ऑपरेशनों के बाद पैलेट (छर्रों) के टुकड़े बाहर निकाले हैं।

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