पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण पर मचा बवाल : अर्बन नक्सल' के बाद अब 'दिमागी नक्सल' पर छिड़ा संग्राम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 80वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2026) पर लाल किले से दिए गए भाषण में "दिमागी नक्सल" शब्द के इस्तेमाल पर देश में एक नया राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। पीएम मोदी ने आगाह किया कि जहां देश के जंगलों से हथियारबंद माओवादी हिंसा को लगभग खत्म कर दिया गया है, वहीं समाज और शहरों में छिपे "दिमागी नक्सलवादी" युवाओं को गुमराह करने और देश में अराजकता फैलाने की साजिश रच रहे हैं; इस बयान पर विपक्ष ने सरकार विरोधी आवाजों को दबाने का आरोप लगाकर तीखा पलटवार किया है।

प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष का आरोप है कि 'अर्बन नक्सल' के बाद अब 'दिमागी नक्सल' जैसे नए शब्दों का इस्तेमाल केवल सरकार के खिलाफ उठने वाली लोकतांत्रिक आवाजों, स्वतंत्र पत्रकारों, छात्रों और बुद्धिजीवियों को डराने व उन्हें देशद्रोही साबित करने के लिए किया जा रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के मंच का उपयोग देश को एकजुट करने के बजाय वैचारिक विभाजन और असहमति की आवाजों को दबाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए था। इस तीखे वैचारिक गतिरोध के बाद इस मुद्दे पर बहस और तेज होने के आसार हैं।


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