सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पीड़ितों को भी है जल्दी इंसाफ का हक

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सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि "स्पीडी ट्रायल" (तेजी से मुकदमा पूरा होने) का अधिकार सिर्फ आरोपी का नहीं, बल्कि पीड़ित का भी एक बेहद कीमती संवैधानिक अधिकार है। 

शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को पूरी तरह पलट दिया है, जिसके तहत एक हत्या के मुकदमे की कार्यवाही को बीच में ही टाल या रोक दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि आरोपी कानूनी खामियों का फायदा उठाकर अनिश्चितकाल के लिए न्याय प्रक्रिया को लटका नहीं सकते।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें

  • पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा: अदालत ने स्पष्ट किया कि न्याय में हो रही देरी न केवल पीड़ित को मानसिक प्रताड़ना देती है, बल्कि यह न्याय की मूल भावना के भी खिलाफ है।
  • गैंगस्टर्स एक्ट की धारा 12 की सही व्याख्या: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की व्याख्या को सुधारते हुए कहा कि गैंगस्टर्स एक्ट की धारा 12 (Section 12 of Gangsters Act) का असल मकसद मुकदमों को रोकना या अटकाना नहीं है, बल्कि अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही को और तेज गति से पूरा करना है।
  • देरी करने की रणनीति पर रोक: इस ऐतिहासिक फैसले का सीधा उद्देश्य उन रसूखदार आरोपियों और गैंगस्टरों की रणनीति को नाकाम करना है, जो ऊपरी अदालतों से बार-बार स्थगन (Stay Order) लेकर ट्रायल को सालों-साल लटकाए रखते हैं।


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