समलैंगिक जोड़ों के मेडिकल राइट्स पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, केंद्र की एक साल की देरी पर उठाए सवाल

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समलैंगिक जोड़ों के बुनियादी अधिकारों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के ढुलमुल रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने एक बेहद महत्वपूर्ण याचिका पर जवाब दाखिल करने में केंद्र की ओर से हुई एक साल की देरी पर कड़े सवाल उठाए हैं। यह याचिका समलैंगिक पार्टनर्स को आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों में एक-दूसरे के 'मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव' (चिकित्सा प्रतिनिधि) के तौर पर कानूनी मान्यता देने की मांग करती है।

हाई कोर्ट ने इस मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए केंद्र सरकार को अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर 2026 की तारीख तय की है।


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