13 सितंबर को न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम पर घमासान

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के आगामी अमेरिका दौरे को लेकर न्यूयॉर्क की राजनीति में भारी गर्माहट देखने को मिल रही है। न्यू यॉर्क स्टेट असेंबली के प्रमुख सदस्य ज़ोहरान ममदानी द्वारा इस दौरे का कड़ा विरोध किए जाने के बाद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और कार्यक्रम के आयोजकों ने मोहन भागवत के इस इवेंट का पुरजोर बचाव किया है। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यक्रम किसी राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक नागरिकों के साथ एक 'खुली बातचीत' (Open Dialogue) के लिए आयोजित किया जा रहा है।

अस्टोरिया और लॉन्ग आइलैंड सिटी का प्रतिनिधित्व करने वाले न्यू यॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य ज़ोहरान ममदानी ने इस कार्यक्रम पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई थी। उन्होंने इवेंट वेन्यू (कार्यक्रम स्थल) के प्रबंधन से मोहन भागवत को होस्ट न करने की अपील करते हुए संघ की विचारधारा पर सवाल उठाए। ममदानी ने आरोप लगाया कि ऐसे कार्यक्रमों से स्थानीय समुदाय के सामाजिक ताने-बाने पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

RSS और आयोजकों का पलटवार

ज़ोहरान ममदानी के इन आरोपों पर संघ के विदेशी विंग 'हिंदू स्वयंसेवक संघ' (HSS) और स्थानीय भारतीय-अमेरिकी समुदाय के संयोजकों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संघ समर्थकों ने ममदानी के विरोध को 'पूर्वाग्रह से ग्रसित' बताते हुए निम्नलिखित तर्क दिए हैं:

  1. पारदर्शी जुड़ाव: यह कार्यक्रम पूरी तरह पारदर्शी है, जहाँ कोई भी आकर सीधे सवाल पूछ सकता है और संघ प्रमुख के विचार जान सकता है।
  2. सामुदायिक एकजुटता: इसका उद्देश्य वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति, दर्शन और विविधता के बारे में संवाद स्थापित करना है, न कि कोई टकराव पैदा करना।
  3. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: अमेरिका जैसे लोकतांत्रिक देश में हर किसी को अपने विचार साझा करने और शांतिपूर्ण संवाद करने का पूरा अधिकार है।


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